नेपाल का सपना चकनाचूर! बाढ़ में ताश के पत्तों की तरह बहा ‘मैत्री ब्रिज’,आज भी भारत ही है इकलौती ‘लाइफलाइन’

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Nepal China India: अगस्त महीने में आए भयानक बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा पर बनाए गये रसुवागढ़ी-तिमुरे में मौजूद ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्प्लेक्स को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. बता दें कि ये चीन के साथ नेपाल को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता था. ऐसे में अब समस्या ये है कि जो तबाही मची है उसके पुननिर्माण में अरबों डॉलर खर्च आने वाले हैं. वहीं ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्प्लेक्स को फिर से बनाने में कई मिलियन डॉलर खर्च होगा.

अचानक आई इस तबाही की वजह से चारों तरफ जमीन से घिरे इस देश का चीन के साथ कोई चालू जमीनी रास्ता नहीं बचा है. नेपाल को चीन से जोड़ने वाले मैत्री पुल के साथ-साथ घरों, सड़कों और पूरे के पूरे गांवों को भी नष्ट कर दिया है. इसके अलावा, पनबिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बर्बाद कर दिया, जिससे कई प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा और नेपाल की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी आई है.

नेपाल में बह गया चीन का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’

ऐसे में नेपाल एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश की पिछली सरकारों ने भारत पर निर्भरता कम करने की जो कोशिशें की थी वो इस बाढ़ के साथ ही बह गई है. ऐसे में अब फिर से नेपाल, भारत पर ही निर्भर हो चुका है. वर्षो से नेपाल ने उत्तरी व्यापार कॉरिडोर को भारत पर अपनी निर्भरता कम करने के एक तरीके के तौर पर पेश किया था. यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के लिए उसके जुड़ाव का एक सीधा रास्ता था.

लेकिन हाल की इस बाढ़ ने यह दिखा दिया कि वह कॉरिडोर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के बजाय राजनीतिक दिखावे पर बना था. आज उत्तरी रास्तों के ढहने के बाद भी जो चीज पूरी तरह से काम कर रही है वह है नेपाल के भारत पर आर्थिक और भौगोलिक संबंध और विश्वास।

ताश के पत्तों की तरह बहा ‘मैत्री ब्रिज’

  • रसुवागढ़ी-तिमुरे क्रॉसिंग के बंद होने से उत्तर की तरफ नेपाल का मुख्य रास्ता कट गया है. कोदारी-झांगमू में देश की एक और ऐतिहासिक बॉर्डर पोस्ट 2015 के भूकंप के बाद से ही बंद पड़ी है.
  • अब रसुवागढ़ी के भी ठप हो जाने से काठमांडू का अपने उत्तरी पड़ोसी देश के साथ जमीन के रास्ते कोई संपर्क नहीं बचा है.
  • मुश्किल इलाकों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाने में अब कई साल लगेंगे और हिमालयी इलाकों में इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के मामले में बीजिंग का पिछला रिकॉर्ड उम्मीद जगाने वाला नहीं है.
  • इस बीच बीरगंज और विराटनगर में भारतीय बॉर्डर चेकपोस्ट पूरी तरह से चालू हैं और हिमालयी देश के व्यापार का भार संभाल रहे हैं.

इस बीच जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रबिम कार्की ने फर्स्ट पोस्ट में लिखा है कि नेपाल का बहुत बड़ा ख्वाब टूट गया. हालांकि रसुवागढ़ी के जरिए होने वाला व्यापार कभी भी उतना बड़ा नहीं था जितना कि इसके आस-पास की राजनीतिक गहमागहमी से लगता था. लेकिन चीन-नेपाल के लिए आयात का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है लेकिन बदले में वह नेपाल से लगभग कुछ भी नहीं खरीदता है. इसके उलट भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.

क्यों नेपाल के लिए भारत आज भी है इकलौती ‘लाइफलाइन’?

  • आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल के कुल विदेशी व्यापार का करीब 64 प्रतिशत हिस्सा भारत के साथ होता है. नेपाल की अर्थव्यवस्था कभी भी अपने दो विशाल पड़ोसियों के बीच सही मायने में संतुलित नहीं रही. यह पूरी तरह से भारत पर टिकी हुई थी.
  • रासुवा और नुवाकोट के तबाह हुए जिलों को फिर से बसाने के लिए जरूरी आपातकालीन सप्लाई, भारी कंस्ट्रक्शन का सामान, ईंधन और मशीनरी भारत से जुड़ी सड़कों और भारतीय बंदरगाहों के जरिए ही भेजी जाएगी.
  • अभी यही एकमात्र ऐसा नेटवर्क है जो बीजिंग से अफसरशाही वाली मंजूरी का इंतजार किए बिना इतनी बड़ी मात्रा में सामान तेजी से नेपाल पहुंचा सकता है.
  • भारत में काम करने वाले दस लाख से अधिक नेपाली लोग लगातार पैसे भेज रहे हैं, जो बाढ़ से प्रभावित जिलों के परिवारों के लिए एक अहम सहारा बना हुआ है.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चीन के निवेश को पूरी तरह छोड़ दिया जाएगा या यह मान लिया जाएगा कि काठमांडू को भविष्य में एक चालू उत्तरी कॉरिडोर में कोई दिलचस्पी नहीं है. लेकिन एक व्यावहारिक नीति को इस बात पर ध्यान देना होगा कि प्रकृति ने नेपाल की उस महत्वाकांक्षा के साथ क्या किया है. जिन पहाड़ों से एक वैकल्पिक बड़े बाजार का रास्ता खुलने की उम्मीद थी उसने ही सारी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है.

Latest News

केमिस्ट्री के नोबेल पुरस्कार का ऐलान, 95 साल के बुजुर्ग को ‘शानदार’ खोज के लिए मिला यह सम्मान

Nobel Prize in Chemistry: इस साल केमिस्ट्री यानि रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार फ्रांस में जन्मे 95 वर्षीय...

More Articles Like This

Exit mobile version