Nepal: जिस नेपाल में 50 साल से गांजा रखना, बेचना और पीना गैरकानूनी था, वहां अब गांजे की खेती को कानूनी मंजूरी दे दी है. नेपाल के गंडकी प्रांत के मुताबिक यह खेती सख्त सरकारी नियमों और निगरानी में ही होगी. अर्थात अब इस प्रांत में तय नियमों के तहत गांजे की खेती और उसका व्यावसायिक उत्पादन किया जा सकेगा.
दरअसल, गंडकी प्रांत की उद्योग और पर्यटन मंत्री यशोदा रिमाल ने विधानसभा में “दवा और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजा खेती के रेगुलेशन और मैनेजमेंट से जुड़ा विधेयक” पेश किया था. ऐसे में गंडकी प्रांत विधानसभा के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद धिताल ने घोषणा की कि सभी संशोधन सर्वसम्मति से मंजूर कर लिए गए हैं.
खेती पर होगी सरकार की सख्त निगरानी
इस नए कानून के बाद गंडकी प्रांत में दवाइयों और औद्योगिक सामान बनाने के लिए गांजे की खेती की अनुमति होगी. हालांकि खेती केवल उन्हीं इलाकों में की जा सकेगी, जिन्हें प्रांतीय सरकार तय करेगी. इसके लिए पहले सरकारी मंजूरी लेना जरूरी होगा और पूरी खेती पर सरकार की सख्त निगरानी रहेगी.
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क्या है गांजे की खेती के नियम
नए कानून के अनुसार, उगाए जाने वाले गांजे में THC (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) की मात्रा 3 प्रतिशत से कम होनी चाहिए. और यह खेती सरकार द्वारा तय किए गए इलाकों में और उसकी निगरानी में ही होगी.
ऐसे में जो लोग या संस्थाएं गांजे की खेती करना चाहेंगी, उन्हें पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी. कानून में यह भी कहा गया है कि गांजे से बने हर उत्पाद की बिक्री या इस्तेमाल से पहले उसकी रासायनिक जांच होगी. इसके लिए प्रांतीय सरकार अपने लैब बना सकती है या किसी दूसरी संस्था की मदद ले सकती है. मंत्री ने बताया कि इस कानून में गांजे के गलत इस्तेमाल को रोकने, इलाज और नशा छोड़ने की सुविधा से जुड़े कई प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.
नेपाल में बैन है गांजा
बता दें कि साल 1976 से गांजे का व्यक्तिगत इस्तेमाल और उसकी बिक्री गैरकानूनी है. इसके तहत गांजे से जुड़े मामलों में उसकी मात्रा के हिसाब से एक महीने से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है. हालांकि नेपाल का गृह मंत्रालय कुछ खास परिस्थितियों में सीमित इस्तेमाल की व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई आधिकारिक नियम लागू नहीं किए गए हैं.

