New START treaty: अमेरिका परमाणु हथियारों को लेकर जेनेवा में रूस और चीन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहा है. इसकी जानकारी मीडिया द्वारा दी गई है. यह बैठक उस अंतिम समझौते (न्यू स्टार्ट समझौता) के खत्म होने के बाद हो रही है, जो अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करता था.
एक वरिष्ठ विदेश विभाग के अधिकारी ने जेनेवा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और फिर चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में न्यू स्टार्ट समझौता (New START) खत्म हो गया था. इसके बाद वॉशिंगटन में रूस और चीन के साथ शुरुआती बैठकें हुई थीं.
इन देशों के पास है परमाणु ताकत
अधिकारी ने कहा कि जेनेवा की बैठकें उससे ज्यादा गंभीर और विस्तार वाली हैं. अमेरिका ने हाल के हफ्तों में परमाणु ताकत रखने वाले देशों यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस से भी कई बार बात की है. बता दें कि दुनिया में वर्तमान में कुल 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं. रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), भारत, पाकिस्तान, इजराइल (आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया है) और नॉर्थ कोरिया.
बैठक की जरूरत क्यों पड़ी?
बता दें कि न्यू स्टार्ट अमेरिका और रूस के बीच बचा हुआ आखिरी समझौता था, जो परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करता था. लेकिन यह समझौता इस साल 5 फरवरी को खत्म हो गया. लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए समझौते की मांग कर रहे हैं, जिसमें चीन को भी शामिल किया जाए.
दरअसल, चीन के पास रूस और अमेरिका से कम परमाणु हथियार हैं, लेकिन उसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है. चीन ने सार्वजनिक रूप से तीन देशों के नए समझौते में शामिल होने से इनकार किया है.
भविष्य में बेहतर समझौते होने पर फोकस
जेनेवा में निरस्त्रीकरण के लिए हुए इस बैठक में अमेरिका के अधिकारी क्रिस्टोफर यी ने कहा कि न्यू स्टार्ट समझौते में कई कमियां थीं और इसमें चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियारों का सही हिसाब नहीं था. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप बहुपक्षीय बातचीत और हथियार नियंत्रण वार्ता को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि भविष्य में बेहतर समझौता हो सके.
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगला कदम यह हो सकता है कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (P5) के सामने लाया जाए, जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का तरीका तय नहीं है.
खुद को किसी एक तरीके तक सीमित नहीं रखेगा अमेरिका
उन्होंने कहा कि यह दो देशों के बीच, कई देशों के बीच या कुछ देशों के समूह में भी हो सकती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका खुद को किसी एक तरीके तक सीमित नहीं रखेगा. वह हर संभव तरीका अपनाएगा, ताकि बेहतर समझौता हो सके और दुनिया में परमाणु हथियार कम हों.
बता दें कि दुनिया में वर्तमान में कुल 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं. रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), भारत, पाकिस्तान, इजराइल (आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया है) और नॉर्थ कोरिया.
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