‘मौत के दरवाजे को तीन बार खटखटाकर वापस लौटी नॉर्मा’, आंखों देखा हाल सुनकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे!

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Washington: अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाली 80 साल की पादरी नॉर्मा एडवर्ड्स मौत के दरवाजे को तीन बार खटखटाकर वापस लौटी हैं. आज वह बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के बीच रहकर उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त करती हैं. नॉर्मा का मानना है कि यह अंत नहीं बल्कि एक नए आयाम में प्रवेश की शुरुआत है. जब तक सीने में सांस चल रही है, तब तक आपके पास कुछ महान करने का अवसर है. हमारा शरीर भले ही मिट जाए लेकिन चेतना या आत्मा अजर-अमर है.

किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी

आइए उनकी जुबानी मृत्यु के बाद का आंखों देखा हाल बताते हैं, जो किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. नॉर्मा के साथ मौत का पहला वाकया महज 20 साल की उम्र में हुआ. एक मेडिकल इमरजेंसी के दौरान जब उनकी धड़कनें रुक गईं तो डॉक्टरों ने उन्हें क्लीनिकली डेड मान लिया. नॉर्मा का कहना है कि उस वक्त वे अपने शरीर से बाहर निकलकर छत के पास से डॉक्टरों को अपना इलाज करते देख रही थीं.

स्क्रीन पर बार-बार एक ही संदेश

अचानक वे एक अंधेरी सुरंग से होते हुए अलौकिक सफेद रोशनी के सामने खड़ी थीं. वहाँ उन्होंने एक विशाल स्क्रीन देखी, जिसे वे अपनी जिंदगी का लेखा-जोखा मानती हैं. इस स्क्रीन पर तीन हिस्से थे. वह जीवन जो उनके जन्म से पहले तय किया गया था. वह जीवन जो उन्होंने असल में जिया. दोनों के बीच का संतुलन. हैरानी की बात यह थी कि उस स्क्रीन पर बार-बार एक ही संदेश आ रहा था. मकसद अभी अधूरा है.

नॉर्मा की अपनी स्वर्गवासी चाची से हुई मुलाकात

वहां नॉर्मा की मुलाकात अपनी स्वर्गवासी चाची से हुई, जिन्होंने उन्हें छूने से मना करते हुए संदेश दिया कि जीवन कभी खत्म नहीं होता. जब उनकी आत्मा को दोबारा उनके शरीर में भेजा गया तो वह अनुभव बेहद कष्टकारी था. नॉर्मा ने इसकी तुलना एक विशाल आकाशगंगा को चाय के छोटे से प्याले में भरने से की. वापस आने के बाद उनमें ऐसी ऊर्जा आ गई कि वे लोगों के शरीर के अंदर की बीमारियां देख सकती थीं और उनके पास आते ही बिजली के बल्ब तक फ्यूज हो जाते थे.

अभी खत्म नहीं हुआ है मिशन

मौत से नॉर्मा का दूसरा और तीसरा सामना हाल ही में नवंबर 2024 में हुआ, जब उन्हें दिल का दौरा पड़ा. एम्बुलेंस में ले जाते समय वे फिर से मृत्यु के आगोश में चली गईं. इस बार एक महिला फरिश्ते ने उन्हें रास्ता दिखाया और फिर वही बात दोहराई गई कि उनका मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्हें लोगों के मन से मौत का डर निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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