पश्चिम एशिया तनाव का असर: नेपाल और मालदीव समेत अन्य देशों के पर्यटन में आई गिरावट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के हर कोने में दिखाई देने लगा है. यह संकट सिर्फ तेल बाजार या राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और वैश्विक पर्यटन उद्योग पर भी पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से आई बढ़ोतरी ने हवाई यात्रा को महंगा बना दिया है, जिससे यात्रियों की योजनाएं बिगड़ रही हैं और पर्यटन उद्योग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

नेपाल में पर्यटन क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर

तेल की कीमतों में उछाल का सबसे ज्यादा असर नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है. वहां की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बढ़ते हवाई किराए ने यात्रियों को अपनी यात्राएं रद्द करने पर मजबूर कर दिया है. काठमांडू के एक प्रमुख होटल व्यवसायी योगेंद्र शाक्य को अपनी पारिवारिक विदेश यात्रा बीच में ही रद्द करनी पड़ी, क्योंकि टिकट की कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं. उन्होंने बताया कि हवाई किराया इतना महंगा हो गया है कि अब लोग यात्रा करने से डरने लगे हैं और अपनी योजनाएं बदल रहे हैं.

हवाई किराए में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

इस स्थिति को समझने के लिए हवाई किराए में हुई बढ़ोतरी पर नजर डालना जरूरी है. काठमांडू से हांगकांग का एकतरफा टिकट अब लगभग 1,90,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले के मुकाबले कई गुना अधिक है. इसी तरह न्यूयॉर्क से काठमांडू का किराया 1,00,000 रुपये से बढ़कर 1,67,000 रुपये हो गया है. काठमांडू से दुबई जाने का किराया 35,000 रुपये से बढ़कर 78,000 रुपये तक पहुंच चुका है. सिडनी के लिए टिकट, जो पहले लगभग 80,000 रुपये था, अब करीब 1,90,000 रुपये हो गया है.

अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी किराया हुआ महंगा

जापान जाने का किराया 80,000 रुपये से बढ़कर 1,30,000 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि बैंकॉक मार्ग पर किराया 35,000 रुपये से बढ़कर 1,05,000 रुपये हो गया है. कुआलालंपुर के लिए टिकट, जो पहले 40,000 रुपये में मिल जाता था, अब 1,70,000 रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि काठमांडू से दिल्ली के बीच किराए में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया है और यह लगभग 18,000 रुपये के आसपास बना हुआ है, लेकिन अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर किराए में भारी उछाल ने यात्रियों की जेब पर गहरा असर डाला है. इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है, जो अभी यात्रा की योजना बना रहे थे, क्योंकि नई बुकिंग में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है.

विमान ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल

इस पूरे संकट की जड़ विमान ईंधन की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है. नेपाल में विमान ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की कीमत में लगभग 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. वहीं घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है. इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ा है.

ट्रैवल इंडस्ट्री में गिरावट, नई बुकिंग पर असर

ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि जिन लोगों ने पहले ही टिकट बुक कर लिए थे, उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन नए यात्रियों की संख्या तेजी से घट रही है. लोग या तो अपनी यात्राएं टाल रहे हैं या फिर पूरी तरह रद्द कर रहे हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग में सुस्ती साफ दिखाई देने लगी है. इस संकट का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है. मालदीव और मॉरीशस जैसे देश, जिनकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है, वहां भी हालात बिगड़ने लगे हैं.

पर्यटन आधारित देशों पर गहरा संकट

मालदीव में पर्यटकों की संख्या पहले ही करीब 30 प्रतिशत तक घट चुकी है. वहां के पूर्व राष्ट्रपति ने भी इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि पर्यटन में गिरावट और ईंधन की बढ़ती कीमतें देश के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं. वहीं मॉरीशस में भी दुबई के जरिए होने वाली उड़ानों में बाधा आने से यात्रियों की संख्या में कमी आई है, जिससे पर्यटन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इस पूरे घटनाक्रम का एक और बड़ा असर प्रवासी श्रमिकों पर भी पड़ा है.

प्रवासी श्रमिकों पर भी पड़ा असर

जो लोग काम के लिए विदेश जाते हैं, उनके लिए यात्रा करना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है. कई लोग महंगे टिकट के कारण अपनी यात्रा टाल रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है.

आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही और वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है. हवाई किराया और महंगा हो सकता है, जिससे पर्यटन उद्योग को और बड़ा झटका लग सकता है.

निष्कर्ष: वैश्विक संकट बनता तेल का असर

कुल मिलाकर देखा जाए तो तेल संकट अब केवल आर्थिक समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिसका असर आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी पर पड़ रहा है. आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.

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