ऑपरेशन सिंदूर का अभी तक पाकिस्तान में खौफ, बॉर्डर से हटाए 72 आतंकी लॉन्चपैड

Operation Sindoor : भारत को ऑपरेशन सिंदूर के चलाए काफी समय बीत चुका है लेकिन पाकिस्‍तान में अभी तक दहशत बनी हुई है. ऐसे में पाकिस्‍तान अपना हर कदम फूंक-फूंककर उठा रहा है. इसी के वजह से पाकिस्तान ने आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेलने के लिए तैयार 72 से अधिक लॉन्चपैड को भीतर के इलाकों में शिफ्ट कर दिया है.

इस मामले को लेकर सीमा सुरक्षा बल ने कहा कि यदि सरकार सीमा पार अभियान ऑपरेशन सिंदूर 2.0 शुरू करने का फैसला करती है तो ऐसे में सुरक्षा बल दुश्‍मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. अधिकारियों का कहना है कि बीएसएफ 7-10 मई तक चार दिनों तक चली सैन्य कार्रवाई को रोकने पर बनी सहमति का सम्मान कर रही है.

पाक सरकार ने भीतरी इलाके में शिफ्ट किया लॉन्चपैड

ऐसे में बीएसएफ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) विक्रम कुंवर ने कहा कि ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ ने सीमा पर कई आतंकी लॉन्चपैड को नष्ट कर दिया गया था और इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान सरकार ने ऐसे लॉन्चपैड को भीतरी इलाके में शिफ्ट कर दिया है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार 12 लॉन्चपैड सियालकोट और जफरवाल में काम कर रहे हैं, जो वास्तव में बॉर्डर पर नहीं हैं.’’

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया- डीआईजी

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, विक्रम कुंवर ने बीएसएफ के जम्मू फ्रंटियर के महानिरीक्षक (IG), शशांक आनंद और डीआईजी कुलवंत राय शर्मा के साथ 2025 में बल की उपलब्धियों को उजागर करने के लिए संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. इसके साथ ही उसमें उन्‍होंने ऑपरेशन सिंदूर में बल की भूमिका की जानकारी दी, जो 22 अप्रैल को सीमा पार से जुड़े पहलगाम नरसंहार के लिए भारत की सैन्य प्रतिक्रिया थी.

भारत में घुसपैठ के समय एक्टिव होता है लॉन्चपैड 

जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इन लॉन्चपैड के साथ-साथ उनमें मौजूद आतंकवादियों की संख्या भी बदलती रहती है. इस मामले को लेकर DIG कुंवर ने बताया कि ‘‘वे वहां स्थायी रूप से नहीं रहते. उन्‍होंने ये भी बताया कि ये लॉन्चपैड आमतौर पर तब सक्रिय होते हैं जब आतंकवादियों को भारत में भेजना होता है. इतना ही नही बल्कि सुरक्षा के लिए एक साथ इन समूहों को दो या तीन से ज्यादा नहीं रखा जाता.’’

संयुक्त रूप से ट्रेनिंग लेने के लिए बनाया ग्रुप

रिपोर्ट में आमतौर पर कहा जाता है कि लॉन्चपैड पर तैनाती की गई है, ऐसे में अनुमान लगाते हुए कहा जा रहा है कि आतंकवादियों को अन्य क्षेत्रों में ले जाने से पहले ट्रेनिंग दिया गया है. इस मामले को लेकर डीआईजी कुंवर का कहना है कि ‘‘पहले निर्धारित इलाके होते थे और आमतौर पर निचले इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के लोग आतंकी सक्रिय होते थे. इसके साथ ही  ऊपरी इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कार्य करते थे और ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने मिलकर एक ग्रुप बनाया ताकि संयुक्त रूप से ट्रेनिंग ले सके.’’

हमारे जवानों को हर तरह के युद्धों का अनुभव

ऐसे में आईजी आनंद का कहना है कि यदि सरकार ऑपरेशन सिंदूर को फिर से शुरू करने का फैसला करती है तो बीएसएफ सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए तैयार है. उनका कहना है कि ‘‘अगर हम 1965, 1971, 1999 के कारगिल युद्ध या ऑपरेशन सिंदूर की बात करें तो हमारे जवानों को हर तरह के युद्धों का अच्छा अनुभव है, चाहे वह पारंपरिक युद्ध हो या हाइब्रिड युद्ध.’’

118 पाकिस्तानी पोस्ट किए बर्बाद- बीएसएफ

इसके साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि ‘‘अगर हमें मौका मिले तो हम मई में किए गए नुकसान से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के समय हमने जम्मू के इलाके में 118 पाकिस्तानी पोस्ट बर्बाद किए. साथ ही उनके सर्विलांस इक्विपमेंट को भी भारी नुकसान पहुंचाया. इस दौरान सरकार जो भी नीति तय करेगी, बीएसएफ उसमें अपनी भूमिका निभाएगा.’’

परिस्थितियों के अनुसार बीएसएफ बना रही योजना

आईजी का कहना है कि ‘‘ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्‍तान को हुए नुकसान से उभरने के लिए काफी समय लगा. ऐसे में इसे देखते हुए उन्‍होंने कुछ जगहों पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन उनकी सभी गतिविधियां हमारी निगरानी में हैं.’’ इसके साथ ही बदलती परिस्थितियों को देखते हुए बीएसएफ अपनी योजना बना रही है और जब हमें मौका मिलेगा तो हम उचित कार्रवाई करेंगे.

हमारा जवाब हमले को बढ़ाना नही था- रक्षामंत्री

इतना ही नही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक और सैन्य तंत्र के बेहतरीन तालमेल का शानदार उदाहरण है. उन्होंने ये भी कहा कि “अभी कुछ ही समय पहले ऑपरेशन सिंदूर हुआ. फिलहाल हमारा जवाब हमले को बढ़ाना नहीं था, लेकिन पाकिस्तान की हरकतों ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद बॉर्डर पर परिस्थिति को सामान्य नहीं रहने दिया.” इसके चलते जिस तरह से देश भर में मॉक ड्रिल हुए और हमारे प्रशासनिक अधिकारियों ने उस मॉक ड्रिल को सफलतापूर्वक जनता तक समझाते हुए पहुंचाया, वह आप सबके लोक सेवक होने का एक बेहतरीन उदाहरण है.

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