भारत अपने एयरोस्पेस और एविएशन इकोसिस्टम में बहुत बड़ा बदलाव देख रहा है, जो देसी टेक्नोलॉजी, मजबूत इंडस्ट्री पार्टनरशिप और पूरी सरकार के दृष्टिकोण से हो रहा है. उक्त बातें केंद्रीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कही. राज्यमंत्री ने आगे कहा कि पिछले 10 सालों में भारत में एविएशन सेक्टर में बड़ी तेजी आई है और अब हवाई यात्रा आम लोगों की पहुंच में आ रही है. उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने उड़ान योजना शुरू की थी, तब बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि यह इतना बड़ा बदलाव लाएगा, लेकिन अब देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हो चुकी है, नए रूट शुरू हो रहे हैं और यात्रियों की संख्या भी कई गुना बढ़ गई है.
छोटे यात्री विमानों की बढ़ेगी मांग
केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले 10 सालों में देश को 30,000 से ज्यादा नए पायलटों की जरूरत पड़ेगी और छोटे यात्री विमानों की मांग भी काफी बढ़ेगी. डॉ. सिंह ने नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज की तारीफ करते हुए कहा कि संस्था ने देश में सस्ते हवाई सफर और पायलट ट्रेनिंग के लिए स्वदेशी दो-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट और छोटे विमानों के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस दौरान उनहोंने हंसा-3 (एनजी) का प्रोडक्शन वर्ज़न लॉन्च किया, जो भारत का पहला ऑल-कम्पोजिट टू-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट है, जिसे पायलट ट्रेनिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है.
रीजनल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
इस एयरक्राफ्ट से अगले दो दशकों में भारत में लगभग 30,000 पायलटों की जरूरत पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. डॉ. सिंह ने इस पर खुशी जताते हुए बताया कि इंडस्ट्री पार्टनर मेसर्स पायनियर क्लीन एम्प्स पहले ही आंध्र प्रदेश के कुप्पम में 150 करोड़ रुपए की फैक्ट्री स्थापित कर रहा है, जो सालाना 100 एयरक्राफ्ट तक का उत्पादन करेगी. इसके अलावा, उन्होंने सीएसआईआर-एनएएल के 19-सीटर सारस एमके-2 एयरक्राफ्ट पर चल रहे काम के बारे में भी जानकारी दी, जो उड़ान जैसी स्कीम के तहत रीजनल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा.