पाकिस्तान के लिए बुरी खबर? इंडियन आर्मी ने शुरू की बड़ी तैयारी, शहबाज-मुनीर नहीं कर पाएंगे मुकाबला

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Operation Sindoor : ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है. बता दें कि पाकिस्तान की साजिशों को भारतीय सेना ने लद्दाख से लेकर गुजरात के भुज इलाके तक जमींदोज कर दिया. जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है और तैयारियों को पिछले एक साल से लगातार धार दी जा रही है. इसी कड़ी में गुजरात के सबसे विषम इलाकों- क्रीक और रन- में भी सेना रोज पसीना बहा रही है. इसके साथ ही भारतीय सेना क्रीक के 96 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में अपनी हाई-स्पीड बोट के जरिए निगरानी को लगातार मजबूत बनाए हुए है.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यही स्थिति रही और पिछले एक साल में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है. बताया जा रहा है कि क्रीक का पूरा इलाका सेना की 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड के अधीन आता है. इतना ही नही बल्कि ब्रिगेड कमांड ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठाए गए कदमों का खुलासा किया. ऐसे में इसे लेकर ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरणों में उन्होंने तेजी से सेना की तैनाती कर सुरक्षा सुनिश्चित की, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी आक्रामक ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सके.

ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने कहा

इस मामले को लेकर ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया का कहना है कि 7 से 12 मई के बीच पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए हमारे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की. जिसका भारतीय सेना ने सभी एजेंसियों के साथ मिलकर मुंहतोड़ जवाब दिया. इसके साथ ही एक मजबूत और बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया, जिसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, आर्मी एयर डिफेंस के दस्ते और इंटीग्रेटेड सर्विलांस टीमें शामिल थीं. बताया जा रहा है कि इन सभी ने मिलकर दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर दिया.

पैंगोंग झील में पेट्रोलिंग करने वाली आर्मी की हाई-स्पीड

इतना ही नही बल्कि अगर 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड की बात करें तो यह देश की एक अनोखी फॉर्मेशन है, जिसमें इंफैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और आर्मी इंजीनियर्स एक साथ शामिल हैं. जानाकरी के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद पैंगोंग झील में पेट्रोलिंग करने वाली आर्मी की हाई-स्पीड पेट्रोल बोट क्रीक इलाके में भी तैनात हैं. बता दें कि इनका मुख्य कार्य बीएसएफ और कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर क्रीक क्षेत्र में पेट्रोलिंग करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

पाकिस्तान के 600 से अधिक ड्रोन मार गिराए थे

साथ ही अगर पूरे पश्चिमी सीमा की बात करें तो भारतीय सेना के एयर डिफेंस गन और मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के 600 से अधिक ड्रोन मार गिराए, इसमें सबसे महत्‍वपूर्ण भूमिका एल-70 की रही. कच्छ क्षेत्र में तैनात एयर डिफेंस यूनिट के कमांडिंग अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिट ने तेजी से कार्रवाई की और तुरंत सक्रिय हो गई.

कच्छ सेक्टर में सुनिश्चित की गई सेना की सुरक्षा

ऐसे में मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि राजस्थान और कच्छ सेक्टर में सेना और महत्वपूर्ण नागरिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई. 7 मई तक सभी एयर डिफेंस सिस्टम और टुकड़ियां पूरी तरह ऑपरेशनल तैनाती में आ चुकी थीं. इसके साथ ही अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के ड्रोन को लगातार मार गिराया गया और पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं हुआ. बता दें कि पाकिस्तान को उसकी गुस्ताखी का सबक सिखाने के लिए भारतीय टैंक और तोपों को भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था.

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