New Delhi: पाकिस्तान- ईरान के बीच सीमा पर आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं. इतना ही नहीं इसके साथ ही अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी भी देखी गई है. नौसेना की मौजूदगी और ईरान के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने बताया कि तकनीकी समस्याओं और एहतियाती कदमों के कारण पाकिस्तान के साथ सीमा पार आवाजाही और लेनदेन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.
व्यापारिक गतिविधियां रोकने की जानकारी सामने आई
दोनों देशों के अधिकारी इस समस्या को सुलझाने के लिए लगातार संपर्क में हैं. पाकिस्तान की ओर से भी सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां रोकने की जानकारी सामने आई है. 16 अक्टूबर को एक आधिकारिक आदेश जारी कर गब्द-रिमदान और तफ्तान सीमा चौकियों के रास्ते व्यापार रोक दिया. कहा तो जा रहा है कि सीमा को सुरक्षा चिंताओं, तस्करी और आतंकवाद विरोधी प्रयासों के चलते बंद किया गया है लेकिन ताजा गतिविधियां कुछ और ही कहानी कह रही हैं.
अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां भी संदिग्ध
इसी बीच अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां भी संदिग्ध परिस्थितियां पैदा कर रही हैं. अमेरिकी डिस्ट्रॉयर युद्धपोत पाकिस्तान के तट से लगभग 400 किलोमीटर दूर एक्टिव हो रहे हैं. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी को ईरान के साथ बढ़े तनाव के संदर्भ में न चाहते हुए भी देखा जा रहा है. अमेरिका की रणनीति में ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना, समुद्री गतिविधियों पर निगरानी रखना और जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प तैयार रखना शामिल हो सकता है.
ईरान जवाबी कार्रवाई में एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल
अमेरिकी युद्धपोतों का ईरानी तट से दूर रहना इस आशंका से भी जुड़ा बताया जा रहा है कि ईरान जवाबी कार्रवाई में एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि इनकी संख्या को लेकर कोई सही आंकड़ा सामने नहीं आया है. सिर्फ सैन्य तैनाती अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि हमला होने वाला है, लेकिन अमेरिका के रिकॉर्ड को देखते हुए इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है.
क्षेत्रीय हालात पर दबाव
पाकिस्तान-ईरान सीमा बंद होने और अरब सागर में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय हालात पर दबाव बढ़ सकता है. अगर सीमा जल्द खुल जाती है, तो व्यापार और आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है लेकिन यदि सुरक्षा संबंधी विवाद लंबा चलता है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं.
इसे भी पढ़ें. दिवाली से पहले योगी सरकार का तोहफा, यूपी के 12 लाख कर्मचारियों को बोनस और DA में बढ़ोतरी की उम्मीद!

