Islamabad: पाकिस्तान में नागरिकों के बाद नेताओं में भी देश के सैनिकों के खिलाफ आक्रोश बढ रहा है. अब नेता सेना की ओर से लिए जा रहे फैसलों पर सवाल उठाने लगे हैं. बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा (KP) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. इन समस्याओं का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में राजनीतिक वर्ग के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है.
बड़े टकराव की स्थिति
एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान राजनीतिक वर्ग और सेना के बीच बड़े टकराव की स्थिति बन रही है. हालांकि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सख्त नियंत्रण के जरिए हालात पर काबू बनाए रखा है लेकिन अब राजनीतिक वर्ग का धैर्य जवाब देता दिख रहा है. राजनीतिक नेताओं को जनता का सामना करना पड़ता है. वे बलूचिस्तान, पीओके और केपी जैसे इलाकों में हो रही हिंसा की संतोषजनक व्याख्या नहीं कर पा रहे हैं.
सामने आंतरिक चुनौतियां और समस्याएं
राजनीतिक वर्ग का कहना है कि देश के सामने आंतरिक चुनौतियां और समस्याएं हैं जबकि सेना ज्यादातर इन हालात के लिए बाहरी खतरों को जिम्मेदार ठहराती है. इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को आक्रामक पक्ष बताने वाला नैरेटिव अब पहले की तरह प्रभावी नहीं रह गया है. पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन इसका एक उदाहरण हैं. अधिकारी के अनुसार पीओके के लोग अपने क्षेत्र की तुलना सीधे जम्मू-कश्मीर से कर रहे हैं.
आतंकवाद और आंतरिक चुनौतियां
खास तौर पर बुनियादी ढांचे और विकास के मामले में वे पाकिस्तानी प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि दोनों क्षेत्रों के बीच इतना अंतर क्यों है. हाल ही में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के बयान भी पाकिस्तान के मौजूदा हालात को दिखाते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या देश के भीतर मौजूद आतंकवाद और आंतरिक चुनौतियां हैं. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक वर्ग सेना की ओर से नियंत्रित किए जा रहे नैरेटिव से साफ तौर पर परेशान हो चुका है. सेना का ऐसा प्रभाव पहले भी रहा है लेकिन आसिम मुनीर के कार्यकाल में यह और ज्यादा बढ़ गया है.
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