पुतिन के कुरील द्वीप दौरे से भड़का जापान, खुलकर दर्ज कराया विरोध, दोनों देशों में 80 साल पुराना है विवाद

Must Read

New Delhi: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जापान की पुरानी चोट फिर हरी कर दी है. पुतिन सबसे पूर्वी कुरील द्वीपों के दौरे पर पहुंचे हुए हैं. पुतिन पहली बार इन विवादित द्वीपों पर पहुंचे और इतुरूप द्वीप के एक मछली प्रोसेसिंग यूनिट का दौरा किया, जहां उन्हें कैवियार भी परोसा गया. जापान करीब 80 साल से इन इलाकों पर अपना दावा करता आ रहा है. पुतिन के कदम से टोक्यो भड़क उठा और उसने खुलकर विरोध दर्ज कराया.

होक्काइदो तक फैली ज्वालामुखीय द्वीप श्रृंखला

कुरील द्वीप रूस के कामचटका प्रायद्वीप से लेकर जापान के उत्तरी द्वीप होक्काइदो तक फैली ज्वालामुखीय द्वीप श्रृंखला है. इसकी लोकेशन ही इसे खास बनाती है. रूस के लिए ये द्वीप सुदूर पूर्व में उसकी सुरक्षा और समुद्री पहुंच के लिहाज से अहम हैं, जबकि जापान चार द्वीपों को अपना ‘उत्तरी क्षेत्र’ बताता है. विवाद की जड़ द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दिनों में है. 1945 में सोवियत संघ ने इन चार द्वीपों पर कब्जा कर लिया था.

द्वीपों पर करीब 20 हजार रूसी नागरिक

उस समय वहां रहने वाले करीब 17 हजार जापानी लोगों को निकाल दिया गया. अब इन द्वीपों पर करीब 20 हजार रूसी नागरिक रहते हैं. तब से जापान इन इलाकों पर अपना दावा करता रहा है और रूस इन्हें अपने नियंत्रण में रखे हुए है. मामला इतना लंबा खिंचा कि रूस और जापान आज तक द्वितीय विश्व युद्ध की औपचारिक शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए. यही इस दौरे का सबसे बड़ा सवाल है.

रूस और जापान के रिश्ते पहले ही काफी खराब

पुतिन का कुरील दौरा ऐसे वक्त हुआ है जब रूस और जापान के रिश्ते पहले ही काफी खराब हैं. 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. ऐसे में पुतिन का खुद उस इलाके में पहुंचना महज पर्यटन या स्थानीय दौरा नहीं माना जा रहा. इसके अलावा पुतिन कुरील जाने से पहले पास के रूसी द्वीप सखालिन पहुंचे थे, जहां रूसी नौसेना युद्धाभ्यास कर रही थी. इसके बाद उनका कुरील दौरा हुआ.

विवादित द्वीप का दौरा

अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि वह किस तरीके से युद्धपोत पहुंचे. सखालिन में नौसैनिक गतिविधि और उसके बाद विवादित द्वीप का दौरा इस पूरे घटनाक्रम को रणनीतिक नजर से देखने की वजह जरूर देता है. इन द्वीपों की सैन्य अहमियत भी पुरानी है. शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और जापान के साथ तनाव के बीच सोवियत संघ ने यहां बड़ी सैन्य मौजूदगी रखी थी.

इसे भी पढ़ें. भरत तिवारी एनकाउंटरः CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, परिवार को मिलेगी सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद

Latest News

रक्षाबंधन पर लगने वाला है चंद्र ग्रहण, क्या भारत में होगा सूतक का प्रभाव? जानिए क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Chandra grahan on rakshabandhan: सनातन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम विश्वास और स्नेह का प्रतीक...

More Articles Like This