Russia Help Iran: दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी मानी जाने वाली CIA को ईरान ने एक झटके में हिला दिया है. ऐसे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि ईरान को ऐसी जानकारी और तकनीक कहां से मिली, जिसकी मदद से CIA के बेहद गोपनीय अड्डों तक सटीक हमला किया जा सका. इस मामले में रूस पर अंदेशा जताया जा रहा है. अगर ऐसा हुआ है तो यह सीधे तौर पर रूस यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की ओर से दी जाने वाली मदद का बदला ले रहा है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में खाड़ी क्षेत्र में CIA के ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमला हुआ था. फिलहाल, अमेरिकी खुफिया विश्लेषक यह पता लगाने में जुटे हैं कि इसके पीछे कहीं रूस की सीधी तकनीकी या खुफिया मदद तो नहीं थी. हालांकि अभी तक अमेरिकी एजेंसियां किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं.
मार्च में हुए थे सीक्रेट ठिकानों पर हमले
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में दो CIA ठिकानों पर हमला हुआ था. इनमें एक सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास के अंदर मौजूद CIA स्टेशन था, जबकि दूसरा ठिकाना पूर्वी इराक में था. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका भले ही दो ही ठिकानों पर हमले की बात करे, लेकिन इससे ज्यादा CIA फैसलिटी निशाने पर आए, फिलहाल उनकी संख्या और स्थान सार्वजनिक नहीं किए गए.
CIA विदेशों में केवल दूतावासों के भीतर स्टेशन ही नहीं चलाती, बल्कि उसके पास सेफ हाउस, लॉजिस्टिक्स हब, निगरानी केंद्र और कई गुप्त ऑपरेशनल ठिकाने भी होते हैं. इनकी लोकेशन बेहद गोपनीय रखी जाती है. वहीं, रियाद में हुआ हमला सामान्य ड्रोन अटैक नहीं था. अधिकारियों का कहना है कि पहले ड्रोन ने अमेरिकी दूतावास की बाहरी दीवार के कमजोर हिस्से में छेद किया, जबकि दूसरा ड्रोन उसी छेद से अंदर दाखिल हुआ और फिर विस्फोट किया. हमले में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं थी, लेकिन जितने सटीक तरीके से ईरान ने हमला किया उसने अमेरिकी एजेंसियों को चौंका दिया.
क्या रूस कर रहा ईरान की मदद
अमेरिकी और पश्चिमी खुफिया अधिकारियों को शक है कि ईरान ने इस हमले में रूस की मदद से अपग्रेड किए गए शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने ईरान को Kometa-M सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दिया, जो ईरान के अपने सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक है और जिसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से रोकना भी मुश्किल माना जाता है. मार्च में द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी Kometa-M सिस्टम दिए जाने की खबर जारी की थी, हालांकि तब रूस ने इसे ‘फेक न्यूज’ बताते हुए खारिज कर दिया था.
क्या रूस ने दी थी CIA की लोकेशन?
रिपोर्ट के मुताबिक एक पश्चिमी खुफिया एजेंसी के आंतरिक मेमो में यह निष्कर्ष निकाला गया कि रूस ने खाड़ी में मौजूद CIA फैसिलिटीज की टारगेटिंग में भूमिका निभाई हो सकती है. हालांकि अमेरिकी जांच एजेंसियां अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईरान ने वास्तव में रूसी टारगेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया था या नहीं.