भारत को हुए तेल निर्यात का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं करेगा रूस, क्रेमलिन ने कहा- ‘बुरा चाहने वाले बहुत लोग’

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Russia-India Relations: रूस ने भारत को किए जाने वाले कच्चे तेल निर्यात के आंकड़े सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है. उसका कहना है कि इन आकड़ो को ‘बहुत से बुरा चाहने वालों’ से छिपाकर रखेगा. दरअसल, रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने ये टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद की, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की बात कही गई है.

दिमित्री पेसकोव ने भारत को दिए गए तेल के बारे में पूछे जाने पर कहा कि ”नहीं, हम साफ वजहों से मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं देने जा रहे हैं. ये पहली बात है. बुरा चाहने वाले बहुत लोग हैं.”

भारत को एक हफ्ते में 2.2 करोड़ बैरल तेल सप्लाई करने में सक्षम है रूस

रूसी राष्‍ट्रपति के प्रवक्‍ता पेसकोव से भारत की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिनमें कहा गया था कि रूस एक हफ्ते में भारत को 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने में सक्षम है. वहीं, इससे पहले रूस के सरकारी टीवी ने गुरुवार को एक मानचित्र जारी किया था, जिसमें अरब सागर से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते कई टैंकर दिखाए गए थे. ये टैंकर कथित तौर पर भारत के पूर्वी तट पर स्थित रिफाइनरी की ओर जा रहे थे.

रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि उनका देश भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है, क्योंकि अमेरिका-इजराइल हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन लगभग बाधित हो गया है.

दुनियाभर में गहराया तेल संकट

बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से ही पूरे मिडल-ईस्ट में जबरदस्त तनाव की स्थिति बन गई है. ईरान ने अपने नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां से कुल वैश्विक तेल सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की वजह से दुनियाभर में तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है. यही वजह है कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. बता दें कि अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने की शर्त पर भारत के साथ व्यापार समझौता किया था.

इसे भी पढें:-ईरानी तेल नेटवर्क पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, 15 मिलियन डॉलर से अधिक रकम जब्त करने की प्रक्रिया शुरू

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