कुरिल द्वीप पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन तो नाराज हुआ जापान,दर्ज कराया कड़ा विरोध, जानिए क्या है 81 साल पहले का नाता

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Russia Japan: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को पहली बार रूस के एकदम पूर्व में मौजूद कुरिल द्वीप समूह पहुंचे. पुतिन के इस दौरे से नाराज जापान ने रूस के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया. जिसकी वजह ये है कि कभी ये द्वीप जापान के हिस्से में हुआ करते थे. लेकिन 81 साल पहले तब के सोवियत रूस को लीड करने वाले स्टालिन ने सबकुछ बदल गया.

कुरिल द्वीप समूह पहुंचे पुतिन, नाराज हुआ जापान

बता दें कि रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने पुतिन के कुरिल द्वीपों में होने का एक वीडियो जारी किया है. रूसी मीडिया के मुताबिक, पुतिन वहां एक मछली प्रोसेसिंग प्लांट भी गए, जहां उन्हें कैवियार खाने को दिया गया. दरअसल, यह मछलियों के अंड़ों से बनी खास डिश होती है. हालांकि कुरिल द्वीपों पर जाने से पहले पुतिन पास के रूसी द्वीप सखालिन गए थे. वहां रूस की नौसेना सैन्य अभ्यास कर रही थी. सखालिन में पुतिन ने ‘रूस की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने’ को लेकर एक बैठक की.

पुतिन के इस दौरे पर जापान ने कड़ा ऐतराज जताया है. दरअसल, साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े हमले के बाद रूस और जापान के रिश्ते और खराब हो चुके हैं, जबकि रूस के रिश्ते चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ और भी मजबूत हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने एक बयान में कहा कि ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानून, दोनों के हिसाब से जापान का हिस्सा हैं. जापान इस दौरे का कड़ा विरोध करता है.

कैसे शुरू हुआ ये विवाद?

रिपोर्ट के अनुसार, रूस और जापान के बीच इन विवादित द्वीपों को लेकर लंबे समय से तनाव चला आ रहा है. जापान इन्हें ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ यानी उत्तरी क्षेत्र कहता है, लेकिन 1945 में इन द्वीपों पर सोवियत संघ ने कब्जा कर लिया था. कुरिल द्वीप रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं. ये ज्वालामुखीय द्वीपों की एक लंबी श्रृंखला है, जो रूस के कामचटका प्रायद्वीप से लेकर जापान के उत्तरी मुख्य द्वीप होक्काइडो तक फैली हुई है.

बता दें कि सोवियत संघ ने 8 अगस्त 1945 को जापान के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था. यह उस समय हुआ जब अमेरिका जापान के हिरोशिमा शहर पर परमाणु बम गिरा चुका था. इसके करीब 6 दिन बाद ही युद्ध खत्म हो गया था.

इन विवादित द्वीपों के नाम दोनों देशों में लगभग एक जैसे हैं. रूस में इन्हें कुनाशिर, हाबोमाई, शिकोटान और इटुरुप कहा जाता है. जापान में इनके नाम कुनाशिरी, हाबोमाई, शिकोटान और एतोरोफू हैं.

1945 में जापानी लोगों को हटाया गया

इन चार विवादित द्वीपों पर करीब 20 हजार रूसी नागरिक रहते हैं. यहां का मौसम काफी कठोर है. लेकिन इन द्वीपों में सोना और चांदी जैसे खनिज पाए जाते हैं और आसपास के समुद्र में मछलियों की भरपूर मात्रा है. मालूम हो कि द्वितीय विश्व युद्ध में जब इन द्वीपों पर सोवियत संघ का कब्जा हुआ, तब वहां रहने वाले करीब 17 हजार जापानी लोगों को मॉस्को ने वहां से निकाल दिया. इसके बाद इन द्वीपों की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई. शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) के दौरान सोवियत संघ ने यहां हवाई और समुद्री सैन्य ठिकाने बनाए. उस समय सोवियत संघ का मुकाबला अमेरिका और उसके सबसे करीबी प्रशांत सहयोगी जापान से था.

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