New Delhi: रूस और अमेरिका के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. इसकी वजह यही है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के पास समुद्र में एक रूसी तेल टैंकर को पकड़कर अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद से पुतिन काफी नाराज चल रहे हैं. हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि अटलांटिक महासागर में किसी भी वक्त बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है. अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए रूस ने वेनेजुएला के पास परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं.
परमाणु पनडुब्बी की सबसे ज्यादा चर्चा
ये सभी रूसी नॉर्दर्न फ्लीट का हिस्सा हैं. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस परमाणु पनडुब्बी की हो रही है जिसे दुनिया समंदर का यमराज कहती है. उधर, रूस की परमाणु पनडुब्बी की हलचल के बाद अमेरिका ने अपना सबसे संवेदनशील हथियार सिस्टम एक्टिव कर दिया है. रूस की जिस पनडुब्बी ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है उसका नाम BS-329 बेलगोरोद है. यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे रहस्यमयी परमाणु पनडुब्बी मानी जाती है.
100 मेगाटन का परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता
इसमें करीब 100 मेगाटन का परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता है. यह पनडुब्बी दुनिया के सबसे खतरनाक अंडरवॉटर न्यूक्लियर ड्रोन पोसाइडन को लॉन्च कर सकती है. इसके जरिए समुद्र के अंदर 500 मीटर तक ऊंची रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा की जा सकती है. माना जाता है कि यह अमेरिका के तटीय शहरों को कुछ ही पलों में तबाह कर सकती है और वहां फैले रेडिएशन के कारण कई सालों तक इंसानों का रहना नामुमकिन हो सकता है.
पनडुब्बी का तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं
दावा किया जाता है कि इस पनडुब्बी का तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है. यहां तक कि अमेरिका के पास भी नहीं. इसी वजह से अमेरिका में डर और बेचैनी का माहौल है. रूस की परमाणु पनडुब्बी की हलचल के बाद अमेरिका ने अपना सबसे संवेदनशील हथियार सिस्टम एक्टिव कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने बोइंग E-4B नाइटवॉच को सक्रिय किया, जिसे अमेरिका का डूम्सडे प्लेन कहा जाता है.
डीसी के बाहर कैंप स्प्रिंग्स एयरफील्ड पर उतारा विमान
यह विमान वॉशिंगटन डीसी के बाहर कैंप स्प्रिंग्स एयरफील्ड पर उतारा गया है. इससे पहले इसका इस्तेमाल 9/11 के आतंकी हमलों के समय किया गया था. इसके बाद इसे सिर्फ बेहद गंभीर हालात में ही एक्टिव किया जाता है.
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