एक ऐसा देश जहां हर रोज हो रही एक फांसी, नाबालिग, विदेशी नागरिक और पत्रकार को भी सजा-ए-मौत

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Saudi Arabia: सऊदी अरब में पिछले साल तकरीबन हर दिन एक आदमी को फांसी पर लटकाया गया है. ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के मुताबिक, सऊदी अरब ने साल 2025 में 356 लोगों को मौत की सजा दी है, जो अपने आप में ही एक नया रिकॉर्ड है. मौत की सजा पाने वाले लोगो में ऐसे विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जिन्हें ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था. वहीं एक ऐसे पत्रकार को भी फांसी दी गई, जिसने कथित तौर पर शाही परिवार में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने की कोशिश की थी.

दरअसल, मानवाधिकार संगठन ने मौत की सजा के खिलाफ विश्व दिवस पर जारी बयान में यह जानकारी दी. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के बावजूद सऊदी अरब में मौत की सजा के लगातार इस्तेमाल पर चिंता जताई. HRW के मुताबिक, साल 2025 में दर्ज की गई मौत की सजा निगरानी शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा सालाना आंकड़ा हैं. यह लगातार दूसरा साल है, जब सऊदी अरब ने मौत की सजा देने का अपना रिकॉर्ड तोड़ा है. इससे पहले साल 2024 में 345 लोगों को मौत की सजा दी गई थी.

मौत की सजा में बढ़ोतरी

HRW में सऊदी अरब मामलों की रिसर्चर जोई शिया ने कहा कि ‘2025 के अंत तक सऊदी अरब में एक डरावना ट्रेंड सामने आया, जिसमें लगातार दूसरे साल मौत की सजाओं में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई. सरकारों को तुरंत क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के प्रशासन पर सभी तरह की मौत की सजाओं को रोकने के लिए दबाव डालना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए दी गई मौत सजाओं के कारण हुई, जिसमें विदेशी नागरिकों की संख्या काफी ज्यादा थी. संगठन ने बताया कि साल 2025 में मौत की सजा पाने वाले 240 लोग ड्रग्स से जुड़े ऐसे अपराधों के दोषी पाए गए थे, इनमें 188 विदेशी नागरिक शामिल थे.

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

मौत की सजा के इन मामलों ने उन अपराधों के लिए सजा दिए जाने को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिनमें किसी दूसरे व्यक्ति की हत्या शामिल नहीं थी, खासकर तब जब आरोपी विदेशी नागरिक हों और उन्हें कानूनी मदद पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़े. ह्यूमन राइट्स वॉच ने उन दो लोगों को मौत की सजा दिए जाने पर विशेष चिंता जताई, जिन्हें नाबालिग रहते हुए किए गए अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था.

HRW ने कहा कि सऊदी अरब में मौत की सजा का सामना कर रहे कई आरोपियो को बेहद अनुचित मुकदमों का सामना करना पड़ा है, जबकि हिरासत के दौरान प्रताड़ना और अन्य दुर्व्यवहार के आरोपों ने न्यायिक प्रक्रिया में भरोसे को और कम कर दिया है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि जिन देशों में मौत की सजा का प्रावधान है, वहां अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून इसके इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदी लगाते हैं.

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