New Delhi: भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर और मुंबई के कप्तान शार्दुल ठाकुर ने एक बड़ा बयान दिया है. ठाकुर ने साफ किया है कि टीम इंडिया के लिए दोबारा खेलने की उनकी उम्मीदें अभी भी पूरी तरह जिंदा हैं और मौका मिलने पर वो देश के लिए अपना बेस्ट देने को तैयार हैं. 34 साल के ठाकुर का मानना है कि पिछले साल इंग्लैंड में खेली गई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के दौरान टीम मैनजमेंट ने उनका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया था.
सिर्फ दो टेस्ट मैचों में खेलने का मौका
शार्दुल ठाकुर को पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ दो टेस्ट मैचों में खेलने का मौका मिला था. इस दौरान उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा था, जहां भारत को लीड्स में हार मिली थी और मैनचेस्टर टेस्ट ड्रॉ रहा था. इस दौरे को याद करते हुए ठाकुर ने गेंदबाजी और रणनीतियों पर सवाल उठाए. बतौर ऑलराउंडर खेलने वाले शार्दुल ठाकुर को उन दो टेस्ट मैचों में सिर्फ 27 ओवर गेंदबाजी करने का मौका मिला.
मेरा सही इस्तेमाल नहीं हुआ
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इंग्लैंड में मेरा सही इस्तेमाल नहीं हुआ. मुझसे बहुत कम गेंदबाजी कराई गई और गलत फेज में इस्तेमाल किया गया. मैं कहूंगा कि वहां कैलकुलेशन एरर्स. हुई थीं. उस दौरे पर भारतीय टीम की कमान शुभमन गिल के हाथों में थी. वहीं, हेड कोच की जिम्मेदारी गौतम गंभीर ही निभा रहे थे. यानी शार्दुल ठाकुर ने कहीं ना कहीं कप्तान और कोच के फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिनके चलते उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर बराबर मौके नहीं मिल सके.
बल्लेबाजी में लीड्स में मेरी गलती
इस दौरे पर बल्लेबाजी में ठाकुर ने 1, 4, और 41 रनों की पारियां खेलीं. उन्होंने अपनी गलती मानते हुए कहा, ‘बल्लेबाजी में लीड्स में मेरी गलती थी कि मैंने एक खराब शॉट खेला. लेकिन मैनचेस्टर में मैंने बेहतरीन बल्लेबाजी की, क्योंकि वहां आसमान में बादल थे, गेंद स्विंग हो रही थी और पिच की एक खास लेंथ से उछाल नहीं मिल रही थी. मैंने उस कठिन स्पेल का सामना किया और भारत ने पहली पारी में मजबूत स्कोर बनाया, जिससे मैच ड्रॉ कराने में मदद मिली.’
अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला
शार्दुल ठाकुर ने करीब 12 महीने पहले इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला था, जो सीरीज 2-2 की बराबरी पर खत्म हुई थी. ऐसे में शार्दुल ठाकुर ने कहा, ‘मैं 100 प्रतिशत दोबारा भारत के लिए खेलने की इच्छा रखता हूं. मेरे दिमाग में यह बात हमेशा चलती रहती है. भले ही आपको टीम से बाहर कर दिया गया हो, लेकिन मुझे लगता है कि उम्मीद एक बहुत बड़ा शब्द है. जब तक उम्मीद जिंदा है, तब तक सब कुछ मुमकिन है.
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