Washington: ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर दूसरे देश पर कार्रवाई की है. सबसे गरीब देशों में से एक सोमालिया की संघीय सरकार को दी जाने वाली सभी प्रकार की सहायता निलंबित कर दी है. हालांकि, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि इस निलंबन से कितनी सहायता प्रभावित होगी, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने विदेशी सहायता व्यय में कटौती की है. यह निलंबन ऐसे समय में किया गया है जब ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में सोमाली शरणार्थियों और प्रवासियों की आलोचना तेज कर दी है.
धोखाधड़ी मामलों को लेकर व्यापक रूप से प्रचारित करने के आरोप
इसमें मिनेसोटा में बाल देखभाल केंद्रों से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों को लेकर व्यापक रूप से प्रचारित करने के आरोप भी शामिल हैं. अफ्रीकी देश सोमालिया दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है और दशकों से लगातार संघर्ष, असुरक्षा तथा गंभीर सूखे सहित कई प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि सोमाली अधिकारियों ने विश्व खाद्य कार्यक्रम के एक अमेरिकी वित्तपोषित गोदाम को ध्वस्त कर दिया और गरीब नागरिकों के लिए निर्धारित 76 मीट्रिक टन खाद्य सहायता जब्त कर ली.
सभी मौजूदा अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों पर रोक
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन जीवनरक्षक सहायता की बर्बादी, चोरी और दुरुपयोग के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं की नीति अपनाता है. बयान में कहा गया है कि विदेश मंत्रालय ने सोमाली संघीय सरकार को लाभ पहुंचाने वाले सभी मौजूदा अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों को रोक दिया है. सहायता की बहाली इस बात पर निर्भर करेगी कि सोमाली संघीय सरकार अपने अस्वीकार्य कृत्यों की जिम्मेदारी लेती है और उपयुक्त सुधारात्मक कदम उठाती है.
अमेरिका आने के इच्छुक सोमालियों पर कड़े प्रतिबंध
प्रशासन ने अमेरिका आने के इच्छुक सोमालियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और पहले से अमेरिका में रह रहे लोगों के लिए वहां बने रहना कठिन कर दिया है. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) को समाप्त कर दिया है और देशवार नए आंकड़े जारी नहीं किए हैं. पूर्ववर्ती डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के अंतिम वर्ष में अमेरिका ने सोमालिया में परियोजनाओं के लिए 77 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की थी हालांकि इसका केवल एक छोटा हिस्सा सीधे सरकार को दिया गया था.
गोपनीय रखने की शर्त पर दी यह जानकारी
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया जिसमें मोगादिशु बंदरगाह प्राधिकरण ने राष्ट्रपति हसन शेख मोहमुद के निर्देश पर डब्ल्यूएफपी के गोदाम को बिना किसी पूर्व सूचना या अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय दाता देशों से समन्वय के ध्वस्त कर दिया. अधिकारी ने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी राजनयिकों की आंतरिक रिपोर्टिंग का हवाला देते हुए नाम गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी.
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