New Delhi: एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले अनुभवी खेल प्रशासक रणधीर सिंह का बुधवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. पूर्व निशानेबाज रणधीर ने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से ओलिंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था. उन्हें 2024 में 4 साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था. उन्होंने 1978 बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता था और बाद में IOA, IOC तथा OCA में अहम भूमिकाएं निभाईं.
पूरे एशिया में ओलंपिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका
पांच बार के ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और अनुभवी खेल प्रशासक रणधीर सिंह ने भारत और पूरे एशिया में ओलंपिक आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 18 अक्टूबर, 1946 को पटियाला में जन्मे रणधीर सिंह का संबंध एक प्रतिष्ठित खेल परिवार से था. उनके चाचा, यादविंद्र सिंह ने टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, जबकि उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह ने 1947 से 1992 तक अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया.
क्रिकेट सहित कई खेलों में आजमाया हाथ
पटियाला के यादविंद्र पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करने और सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद, रणधीर सिंह ने गोल्फ, तैराकी, स्क्वैश और क्रिकेट सहित कई खेलों में हाथ आजमाया. हालांकि, निशानेबाजी विशेष रूप से ट्रैप और स्कीट—ही वह क्षेत्र था जहां उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई. रणधीर सिंह पांच ओलंपिक खेलों 1968 मेक्सिको ओलंपिक, 1972 म्यूनिख ओलंपिक, 1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक, 1980 मॉस्को ओलंपिक और 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
आरक्षित निशानेबाज के रूप में भी अपनी सेवाएं
इससे पहले 1964 के टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने एक आरक्षित निशानेबाज के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं. एक एथलीट के रूप में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में 1978 के एशियाई खेलों में ट्रैप निशानेबाजी में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतना शामिल है. ऐसा करके वह इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने. बाद में 1982 के एशियाई खेलों में उन्होंने एक व्यक्तिगत कांस्य और एक टीम रजत पदक भी अपने नाम किया.
प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित
1979 में, रणधीर सिंह को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, और साथ ही उनके ऐतिहासिक खेल करियर के लिए उन्हें महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार भी प्रदान किया गया. रणधीर सिंह को 1991 में OCA का महासचिव नियुक्त किया गया था और वे 2015 तक इस पद पर रहे. इसके बाद उन्होंने आजीवन उपाध्यक्ष (Life Vice-President) की भूमिका संभाली, जिस पर वे 2021 तक रहे. तत्पश्चात उन्हें इस संस्था का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
खेल परिषद का संस्थापक महासचिव नामित
1998 में, रणधीर सिंह को अफ्रीकी-एशियाई खेल परिषद का संस्थापक महासचिव नामित किया गया और वे 2007 तक इस पद पर बने रहे. 2002 में वे ANOC की कार्यकारी परिषद के सदस्य बने. 2003 से 2005 के बीच, उन्हें WADA बोर्ड में IOC के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया और फिर 2005 में वे WADA की वित्त एवं प्रशासन समिति के सदस्य बन गए. उन्होंने 2019 एशियाई खेलों की समन्वय समिति के अध्यक्ष का पद भी संभाला.
2006 में ANOC से मेरिट अवार्ड
अपनी अमूल्य सेवाओं के लिए रणधीर सिंह को 2005 में OCA अवार्ड ऑफ़ मेरिट, 2006 में ANOC से मेरिट अवार्ड, 2014 में ओलंपिक ऑर्डर (सिल्वर) और भारत सरकार के लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन से खेल विज्ञान में साहित्य की मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया.
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