भविष्य में चीन काे नहीं हाेगी किसी होर्मुज की जरूरत! बीजिंग ने चुपचाप खाेज लिया हर समस्या का समाधान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Hormuz Plan: ईरान जंग से पूरी दुनिया में खलबली है. होर्मुज संकट से पश्चिम एशिया में तो त्राहि-त्राहि है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल-गैस के जहाज जहां-तहां फंसे हैं. अमेरिका-इजरायल के अटैक का बदला ईरान अब होर्मुद बंद करके ले रहा है. इससे भारत समेत कई देशों के जहाज फंसे हैं. अब पूरी दुनिया की नजर होर्मुज पर है कि कब ईरान उससे जहाजों को गुजरने देगा. इस तरह पूरी दुनिया अभी होर्मुज स्ट्रेट पर फंसी है.
ऐसे में चीन चुपचाप इस होर्मुज संकट से बचने का रास्ता बना रहा है. जी हां, अमेरिका-ईरान जंग के कारण तेल के दाम बढ़ चुके हैं. गैस का संकट गहराता जा रहा है. बहरहाल, किसी भी तनाव से तेल के बाजार में हलचल बढ़ती है. कीमतें बढ़ती हैं, सप्लाई का डर बढ़ता है और आज होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी का केंद्र बन गया है. ऐसे में चीन एक अलग रास्ता अपना रहा है.

होर्मुज काे लेकर शांत नहीं चीन  

जी हां, होर्मुज पर चीन अभी हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठा है. वह उसके पैरलल एक अलग व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिससे फ्यूचर में उसे किसी होर्मुज की जरूरत नहीं होगी. चोकपॉइंट्स यानी होर्मुज संकट और जियोपॉलिटिकल जोखिमों पर रिएक्ट करने के बजाय बीजिंग उन पर अपनी निर्भरता पूरी तरह से कम करने के लिए काम कर रहा है. इस स्ट्रैटेजी के सेंटर में देशभर में बिजली सुपरग्रिड बनाने की एक बड़ी कोशिश है, जो देश की इकॉनमी को पावर देने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकती है.

सुपरग्रिड स्ट्रैटेजी

चीन का एनर्जी ट्रांजिशन दो बड़ी सरकारी कंपनियों यानी स्टेट ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना और चाइना सदर्न पावर ग्रिड द्वारा चलाया जा रहा है. ये दोनों मिलकर पहले से ही एक अरब से अधिक लोगों को बिजली सप्लाई करते हैं और देश के अधिकतर हिस्से को कवर करते हैं. अब वे इस पहुंच को और भी ज्यादा स्ट्रैटेजिक चीज में बढ़ा रहे हैं.
इसका मकसद पूरे देश में एक अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क बनाना है, जो बिजली को बहुत दूर तक अच्छे से पहुंचा सके. इससे चीन को बाहर से आए तेल और गैस पर कम और देश में बनी बिजली पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा. यह ब्लूप्रिंट सोचने में आसान है लेकिन इसका स्केल बहुत बड़ा है. रिसोर्स से भरपूर अंदरूनी इलाकों में बनने वाली एनर्जी को पूर्वी तट के इंडस्ट्रियल हब तक पहुंचाया जाता है, जहां डिमांड सबसे अधिक होती है.

अल्ट्रा-हाई वोल्टेज लाइनें: इस बदलाव की रीढ़

इस बदलाव के केंद्र में अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज लाइनें हैं, जिन्हें अक्सर बिजली हाईवे कहा जाता है. ये लाइनें कम से कम नुकसान के साथ हजारों किलोमीटर तक बिजली पहुंचाने में सक्षम हैं. ये दूर-दराज के पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में विंड और सोलर फार्म को पूरब के बड़े मैन्युफैक्चरिंग सेंटर और शहरों से जोड़ती हैं.
इस बदलाव को ट्रैक करने वाली वियतनाम की एक क्रिप्टो फर्म ने इस बदलाव के स्केल के बारे में बताया: ‘चीन एक असली सुपरग्रिड बना रहा है. पश्चिम से पूरब तक बिजली का बहाव, दूर-दराज के इलाकों से तटीय फैक्ट्रियों तक विंड और सोलर. यह कोई थ्योरी नहीं है, यह पहले से ही हो रहा है. अल्ट्रा-हाई वोल्टेज लाइनें पूरे देश में बिजली पहुंचाती हैं, और इसका स्केल बहुत बड़ा है.’ यह सिस्टम न केवल एफिशिएंसी सुधारने के लिए बल्कि चीन के एनर्जी मिक्स को पूरी तरह से बदलने के लिए भी डिजाइन किया गया है.

क्या बना रहा है चीन?

चीन की ग्रिड बढ़ाने की स्ट्रैटेजी बड़ी और टारगेटेड दोनों है. इसमें मुख्य बातें शामिल हैं:
  • पूरे देश में बिजली पहुंचाने के लिए अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाना.
  • हवा और सोलर पावर को अंदरूनी इलाकों से तटीय इंडस्ट्रियल जोन तक पहुंचाना.
  • सरकार की मदद से उधार लेकर बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग करना.
  • इलेक्ट्रिक गाड़ियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंडस्ट्रियल डिमांड को सपोर्ट करने के लिए ग्रिड कैपेसिटी में भारी इन्वेस्ट करना.
  • इम्पोर्टेड तेल और कमजोर समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करना.
  • ईंधन के ग्लोबल चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करना.
  • इस स्ट्रैटेजी का असर चीन की सीमाओं से आगे तक फैला हुआ है.

ग्लोबल तेल मार्केट में चीन की निर्भरता होगी कम

  1. अपनी इकॉनमी के अधिक हिस्से को बिजली देकर और घरेलू एनर्जी सोर्स पर भरोसा करके चीन धीरे-धीरे ग्लोबल तेल मार्केट और उनसे जुड़े रिस्क में अपना एक्सपोजर कम कर रहा है.
  2. होर्मुज की खाड़ी से दुनिया का एक बड़ा तेल गुजरता है. होर्मुज लंबे समय से एनर्जी इंपोर्ट करने वाले देशों के लिए एक बड़ी कमजोरी रही है. चीन दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी कंज्यूमर में से एक है. उसके लिए यह रिस्क खास तौर पर बहुत अधिक है. लेकिन जैसे-जैसे सुपरग्रिड फैलता है, यह कमजोरी कम होने लगती है.
  3. चीन में कोयले, हवा और सोलर से बनी बिजली, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक के सेक्टर में इम्पोर्टेड फ्यूल की जगह ले सकती है. समय के साथ इससे ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावटों का असर कम हो सकता है.

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