दुनिया में खाद्यान्न बर्बादी में दूसरे नंबर पर भारत! हर व्यक्ति साल में औसतन 55 KG खाना करता है बर्बाद

New Delhi: भारत दुनिया में खाद्यान्न बर्बादी में दूसरे नंबर पर है. हर साल 7.8 से 8 करोड़ टन भोजन व फसल बर्बाद होती है, जिसकी कीमत करीब 1.55 लाख करोड़ रुपए बैठती है. चीन पहले नंबर पर है, जहां 10.80 करोड़ टन खाना बर्बाद होता है. यूनाइटेड नेशंस एन्वायरनमैंट प्रोग्राम (यू.एन.ई.पी.) की फूड वेस्ट इंडैक्स रिपोर्ट 2024 में यह बातें सामने आई हैं.

यह सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि नैतिक संकट

दरअसल, हर साल 30 मार्च को पूरी दुनिया ‘इंटरनैशनल डे ऑफ जीरो वेस्ट’ मनाती है. 2026 में इसका फोकस भोजन की बर्बादी पर ध्यान आकर्षित करता है. यह सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि एक नैतिक संकट है, जो हमें सबसे दर्दनाक सच्चाई से रूबरू कराता है. जो खाना बर्बाद होता है, उसे किसी किसान ने कड़ी मेहनत से तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए उगाया था. खेत से मंडियों तक उन मजदूरों ने पहुंचाया जिन्हें खुद पेट भर खाने को नहीं मिल रहा.

दुनिया में 105 करोड़ टन खाना बर्बाद

रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में 105 करोड़ टन खाना बर्बाद हुआ. इसमें से 60 प्रतिशत बर्बादी घरों और खराब भंडारण व्यवस्था के कारण हुई, 28 प्रतिशत होटल-रैस्टोरैंट सैक्टर में और 12 प्रतिशत रिटेल में. यह सिर्फ लोगों की लापरवाही की समस्या नहीं, यह पूरी व्यवस्था की खामी है, सप्लाई चेन की कमजोरियां, नीतियों की कमी और एक ऐसी सोच, जिसमें खाना फैंक देना सामान्य बात बन गई है.

नुकसान और खाने की बर्बादी को रोकना बेहद जरूरी

दूसरी तरफ दुनिया में करीब 78.3 करोड़ लोग आज भी भूख झेल रहे हैं और 30 लाख से ज्यादा लोग संतुलित आहार से वंचित हैं. ऐसे में फसल कटने के बाद होने वाले नुकसान और खाने की बर्बादी को रोकना बेहद जरूरी है. एक तरफ करोड़ों टन अन्न बर्बाद हो रहा है तो दूसरी ओर करोड़ों लोग भूखे पेट सो रहे हैं, कुपोषण अब भी दुनिया में फैला है. यह विडंबना नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की असफलता है.

इंडैक्स में 125 देशों में 111वें स्थान पर है भारत 

इस पूरे संकट में भारत की स्थिति गंभीर और असहज करने वाली है. यू.एन.ई.पी. की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर व्यक्ति साल में औसतन 55 किलो खाना बर्बाद करता है, जो अमरीका (73 किलो) और जर्मनी (75 किलो) से कम है. लेकिन भारत की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ग्लोबल हंगर इंडैक्स में भारत 125 देशों में 111वें स्थान पर है, करीब 19.4 करोड़ लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता. इसलिए भोजन की बर्बादी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, यह करोड़ों लोगों के मुंह से छिना हुआ निवाला है.

8200 टन अनाज खराब

पंजाब, जो करोड़ों लोगों का पेट भर सकता है लेकिन खेत की उपज का एक बड़ा हिस्सा प्लेट तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है. पंजाब में फल और सब्जियों की लगभग 20 प्रतिशत फसल खाने तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है. वर्ष 2019 से 2024 के बीच अकेले एफ.सी.आई. के गोदामों में ही 8200 टन अनाज खराब हुआ, जो देश में सबसे ज्यादा है.

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