वेनेजुएला और ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप की नजर, आखिर क्या चाहता है अमेरिका?

US-Cuba Standoff : अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद क्यूबा को मिलने वाली तेल सप्लाई पर रोक लगा दी गई है, जिसकी वजह से वहां की हालत काफी खराब हो गए हैं. रिपोर्ट का कहना है कि क्यूबा में बार-बार बिजली कट रही है. इसका कारण यह है कि देश के पास पर्याप्त ईंधन नहीं है और उसका बिजली सिस्टम भी काफी पुराना है. जानकारी के मुताबिक, क्यूबा को कई महीनों से बाहर से तेल नहीं मिला है और वह अपनी जरूरत का केवल लगभग 40% ईंधन ही खुद बना पा रहा है.

बता दें कि इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है. इसके साथ ही देश में काफी लोग बिजली के बिना रह रहे हैं. अस्पतालों में काम प्रभावित हुआ है, कई ऑपरेशन रोकने पड़े हैं और कई जगह व्यापार भी बंद हो गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर थी, लेकिन अब हालात और खराब हो गए हैं. बताया जा रहा है कि ईंधन की कमी के कारण जरूरी चीजों की सप्लाई रुक रही है, स्कूल बंद हो रहे हैं और पर्यटन जैसे बड़े उद्योग पर भी असर पड़ा है.

क्‍यूबा को लेकर अमेरिका का सख्‍त रूख

इस मामले को लेकर ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी कहा है कि अमेरिका क्यूबा को लेकर कोई भी बड़ा कदम उठा सकता है. इतना ही नही बल्कि उनकी सरकार ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी है कि अगर वे क्यूबा को तेल देंगे तो उन पर टैक्स या सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. बता दें कि इस दबाव के कारण क्यूबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग पड़ गया है. प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, क्यूबा ने भी सख्त जवाब दिया है.

व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेगा

ऐसे में हालात को लेकर उप विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियोने का कहना है कि देश किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार है और अपनी व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेगा. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने इस बात को माना है कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन उन्होंने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा है कि देश अपने राजनीतिक सिस्टम से पीछे नहीं हटेगा. असल में यह टकराव नया नहीं है. अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव 1959 की क्रांति के बाद से ही चला आ रहा है और समय-समय पर यह बढ़ता रहा है.

क्यूबा की अर्थव्यवस्था हो सकती है कमजोर

हालात को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तेल रोक का असर लंबे समय तक रह सकता है. इससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था और कमजोर हो सकती है और आम लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही, यह स्थिति आगे चलकर बड़े संकट या पलायन जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकती है. फिलहाल दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम हैं और स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है.

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