Iran vs Israel-US War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है. जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल कार्गो की बिक्री के लिए एक ‘विशेष लाइसेंस’ जारी किया है. इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं.
यह विशेष छूट 19 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार यह छूट एक सीमित समय के लिए दी गई है. यह अनुमति केवल उन जहाजों के लिए है जिन पर शुक्रवार रात 12:01 बजे से पहले तेल लादा जा चुका था. यह विशेष छूट 19 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार इस फैसले से बाजार में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल आ सकता है.
तेल की कीमतें कम करने की कोशिश
एक तरफ जहां अमेरिका तेल की कीमतें कम करने की कोशिश कर रहा है वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकता है. बता दें कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से होने वाली सप्लाई बाधित हो गई थी. सप्लाई रुकने से ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी जो 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है.
घरेलू राजनीति को बचाने की रणनीति
दुनिया का लगभग 20% तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. युद्ध की स्थिति ने इस चेन को तोड़ दिया था. जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला केवल दुनिया की भलाई के लिए नहीं बल्कि अपनी घरेलू राजनीति को बचाने के लिए भी है. नवंबर में अमेरिका में चुनाव होने हैं. बढ़ती महंगाई और फ्यूल के दाम सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के लिए खतरा बन सकते हैं. अमेरिका ने अपने रिजर्व स्टॉक से भी 4.5 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है ताकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत को कम किया जा सके.
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