टैरिफ को लेकर अमेरिकी अधिकारी ने किया सनसनीखेज खुलासा, कहा- भारत पर लगने वाला था…

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US-India Relations : कुछ ही समय पहले अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने खुलासा किया कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है. ऐसे में यह मुद्दा हर उच्चस्तरीय बैठक में उठाया जाता है. इसके साथ ही इस मामले को लेकर अमेरिकी संसद में एक विधेयक पेश हुआ था, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. बता दें कि फिलहाल अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है और रूसी तेल खरीदने के वजह से कुल शुल्क लगभग 50% हो गया है.

जानकारी के मुताबिक, किसी भी देश पर लगाए गए अमेरिकी शुल्कों में से सबसे अधिक में से एक है. ऐसा करने का अमेरिका का मुख्‍य उद्देश्‍य रूस को मिलने वाली आय को पूरी तरह रोकने का है ताकि यूक्रेन युद्ध समाप्त हो सके.

अमेरिका ने चीन के साथ यूरोप पर बनाया दबाव

इसके साथ ही यह सवाल उठाया जा रहा है कि अमेरिका चीन पर वैसा ही दबाव क्यों नहीं डालता. इस मामले को लेकर अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन बीजिंग से अपने तरीके से निपट रहा है. ऐसे में उन्‍होंने बताया कि यूरोपीय संघ समेत अन्य देशों पर भी इसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है. यानी भारत के साथ हो रही सख्ती कोई अपवाद नहीं है.

अमेरिका ने ईरान पर खत्‍म की छूट

जानकारी देते हुए बता दें कि अमेरिका ने ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति के तहत आईएफसीए (Iran Freedom and Counter-Proliferation Act) के अंतर्गत दी गई सभी छूट को भी खत्म कर दी है. प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, पहले भारत को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए चाबहार पोर्ट के उपयोग की छूट मिली हुई थी. लेकिन अब यह छूट भी समाप्त कर दी गई है. ऐसे में अधिकारी ने स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि अब चाबहार पोर्ट से होने वाली कोई भी आय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) तक जाएगी, जिस पर प्रतिबंध लागू होंगे.

H1B वीजा शुल्क का भी विवाद

इसके साथ ही एक और अहम मुद्दा H1B वीज़ा से जुड़ा है. कुछ ही समय पहले अमेरिका ने नए आवेदकों के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क लागू किया. इस मामले को लेकर अधिकारी ने बताया कि यह शुल्क केवल नए आवेदकों के लिए है, पहले से मौजूद वीज़ा धारकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा और ये भी बताया कि ऐसा करने का मुख्‍य उद्देश्‍य आवेदन प्रक्रिया में धोखाधड़ी को रोकना है. उच्च योग्य पेशेवरों को लाने वाली कंपनियां यह शुल्क देकर भी आवेदन कर सकेंगी.

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