New Delhi: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलेमन ने ‘विश्वास बहाली’ का बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में लगभग एक साल में सबसे बड़ी जीत है. यह समझौता ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच रिश्ते कुछ महीनों से तनावपूर्ण रहे थे.
अतिरिक्त 25% टैरिफ का क्या होगा?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका द्वारा रूस से तेल आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ का क्या होगा? क्या इसे पूरी तरह हटाया जाएगा या केवल 18% तक घटाया जाएगा. कुगेलेमन ने याद दिलाया कि लगभग एक साल पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्हाइट हाउस में बुलाया था और दोनों नेताओं ने व्यापार समझौते पर चर्चा करने का वादा किया था.
अब यह संभव हुआ
इसके बाद कई दौर की वार्ता के बावजूद समझौता संभव नहीं दिख रहा था लेकिन अब यह संभव हुआ है. विशेषज्ञ ने कहा कि इस समझौते से अन्य विवादित मुद्दों को भी सुलझाने की गति बढ़ सकती है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि समझौते के कई अहम पहलू अभी स्पष्ट नहीं हैं, खासकर ऊर्जा आयात और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे.
भारत रूस से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर देगा या नहीं?
उन्होंने कहा कि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि भारत रूस से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर देगा या नहीं? क्योंकि हाल के महीनों में भारत ने रूस से तेल आयात घटाया है लेकिन पूरी तरह बंद नहीं किया है. कुगेलेमन ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि भारत ने कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को बाजार खोलने पर सहमति दी है या नहीं?
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