US Iran deal: अमेरिका- ईरान के बीच चल रही जंग अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुकी है. दोनों देशों के राष्ट्रपति, डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियान ने अलग-अलग इंग्लिश और फारसी में 14 प्वाइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किया है. ऐसे में अब 60 दिनों का सीजफायर शुरू हो गया है, जिसमें दोनों देश आगे फाइनल डील के लिए परमाणु वार्ता करेंगे.
इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ईरान के पास मौजूद उन परमाणु बम बनाने लायक शुद्ध (संवर्धित या एनरिच्ड) यूरेनियम का क्या होगा, जो पिछले साल से अमेरिकी हमलों के बाद न्यूक्लियर ठिकानों के नीचे दबे पड़े हैं. हालांकि इस मामले को लेकर MoU के 8वें प्वाइंट में प्लानिंग बताई गई है.
ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा?
ईरान के साथ समझौते के इस आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि करीब बम बनाने लायक स्तर के यूरेनियम को कम संवर्धित (लोअर ग्रेड के) यूरेनियम में बदला जाएगा. इस प्रक्रिया को डाउन-ब्लेंडिंग (Down-blending) कहा जाता है. यह काम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगा और ये वहीं पर होगा जहां वे दबे पड़े हैं. यानी ईरान के अंदर ही.
बता दें कि IAEA संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यह भी दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
ट्रंप ने इसपर क्या कहा?
ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद बहुत अधिक शुद्ध यूरेनियम को नष्ट करना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह सुनिश्चित करना कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके. पेरिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, ट्रंप से पूछा गया कि ‘परमाणु मामले की बची हुई समस्या’ को सुलझाना कितना जरूरी है. इस पर उन्होंने कहा कि “यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि उस यूरेनियम तक पहुंचना बहुत मुश्किल है. मुझे नहीं लगता कि कोई भी आसानी से उस तक पहुंच सकता है. हम पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत मेहनत और काफी समय लगेगा.”
साथ ही उन्होंने पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि “B-2 बॉम्बर प्लेन और उन शानदार पायलटों ने अपना काम कर दिया. अब आप समझते हैं कि उन्होंने अपना काम पूरा किया. ट्रंप ने फिर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो.