अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 36वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार यह दावा कर चुके हैं कि ईरान के पास अब न एयरफोर्स बची है और न ही नेवी, वहीं दूसरी ओर जंग के मैदान से सामने आ रही घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं. हाल के घटनाक्रम में अमेरिका को एक के बाद एक सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है, जिसने इस संघर्ष की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
ईरान का बड़ा दावा: एफ-15 के बाद ए-10 विमान भी गिराया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पहले अमेरिकी युद्धक विमान एफ-15ई जेट को मार गिराया और इसके बाद एक और विमान ए-10 वॉर्थोग को भी निशाना बनाया. The Washington Post के अनुसार, एफ-15ई जेट के गिरने के बाद अमेरिकी सेना ने पायलट को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.
बताया गया कि यह दो सीटों वाला एफ-15ई जेट था, जिसमें सवार दो क्रू मेंबर में से एक को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता बताया जा रहा है.
रेस्क्यू मिशन पर हमला
एफ-15ई जेट के क्रैश के बाद जब अमेरिकी सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, तो ईरान ने उस पर भी हमला कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार, पायलट को बचाने के लिए भेजे गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को भी ईरानी फायरिंग का सामना करना पड़ा. हालांकि, इन हेलीकॉप्टरों में सवार अमेरिकी सैनिक घायल हुए, लेकिन दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित अपने बेस पर लौटने में सफल रहे. इस घटना ने जंग के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन की जटिलता और खतरे को भी उजागर कर दिया है.
दूसरा झटका: ए-10 वॉर्थोग पर हमला, पायलट ने किया इजेक्ट
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का दूसरा विमान ए-10 वॉर्थोग भी ईरानी हमले का शिकार हुआ. इस हमले के बाद पायलट ने विमान को कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंचाया और वहां सुरक्षित इजेक्ट कर लिया. यह घटना इस बात का संकेत देती है कि जंग का असर अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा बढ़ता जा रहा है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है. वहीं, एनबीसी न्यूज से बातचीत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “एफ-15 के नुकसान से ईरान के साथ बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा.” यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध के मैदान में अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ा है.
ट्रंप का पुराना दावा और मौजूदा स्थिति
इस घटना से एक हफ्ते पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “ईरान की सेना इस हद तक हार गई है कि हमारे प्लेन सचमुच तेहरान और उनके देश के दूसरे हिस्सों के ऊपर उड़ रहे हैं. वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते.” लेकिन ताजा घटनाओं ने इस दावे को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.
ईरान का सख्त रुख
एनबीसी न्यूज के मुताबिक, ईरान के सरकारी चैनल ने बताया कि एक टीवी रिपोर्टर ने कहा, “जो कोई भी अमेरिकी पायलट को जिंदा पकड़ेगा, उसे एक कीमती इनाम मिलेगा.” इसके अलावा, एक ईरानी गवर्नर ने भी कहा कि जो कोई भी दुश्मन की सेना को पकड़ेगा या मारेगा, उसकी सराहना की जाएगी.
तलाशी अभियान जारी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में उस इलाके के पास तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, जहां विमान गिरा था. इस बीच ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा बयान दिया. उन्होंने लिखा, “ईरान को लगातार 37 बार हराने के बाद उन्होंने जो शानदार बिना-रणनीति वाली लड़ाई शुरू की थी, उसे अब शासन बदलने से घटाकर अरे! क्या कोई हमारे पायलट ढूंढ सकता है? प्लीज? कर दिया गया है. वाह. क्या जबरदस्त तरक्की है. एकदम जीनियस.”
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