पाकिस्तान पर कर्ज का दबाव: UAE ने वापस मांगा 3.5 अरब डॉलर का कर्ज, बढ़ा आर्थिक संकट

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Pakistan Economic Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान (Pakistan) को बड़ा आर्थिक झटका लगा है. पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) को अब संयुक्त अरब अमीरात ने 3.5 अरब डॉलर का कर्ज इस महीने के अंत तक लौटाने के लिए कह दिया है.

यूएई की ओर से इस कर्ज की समयसीमा पहले कई बार बढ़ाई जा चुकी थी, जिससे पाकिस्तान को राहत मिलती रही. लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई ने साफ कर दिया है कि इस बार कोई राहत नहीं दी जाएगी और तय समय पर पूरा पैसा लौटाना होगा. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है.

रिजर्व में पैसा, लेकिन चिंता बरकरार

फिलहाल पाकिस्तान (Pakistan) के पास करीब 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे वह यूएई का कर्ज चुका सकता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करने से आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी कर्ज और मदद पर निर्भर रही है, ऐसे में एक बड़ी रकम का भुगतान भविष्य में नकदी संकट को और गहरा सकता है.

बढ़ता कर्ज: 138 अरब डॉलर तक पहुंचा बोझ

आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान (Pakistan) पर कुल विदेशी कर्ज दिसंबर 2025 तक करीब 138 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. यह आंकड़ा देश की आर्थिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है. पाकिस्तान (Pakistan) ने 31 मार्च 2026 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) से करीब 7.29 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है. इसके अलावा, वह 7 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा कार्यक्रम के तहत भी काम कर रहा है.

मार्च 2026 में IMF ने पाकिस्तान के लिए लगभग 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त जारी करने पर सहमति जताई, जिससे देश को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है.

चीन और सऊदी अरब पर निर्भरता

पाकिस्तान (Pakistan) की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा पहलू यह भी है कि वह कुछ चुनिंदा देशों पर काफी हद तक निर्भर है. चीन (China) उसका सबसे बड़ा कर्जदाता है, जिसने करीब 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है. इसके अलावा सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने भी लगभग 9.16 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता और जमा राशि के रूप में पाकिस्तान की मदद की है. इन देशों की मदद के बिना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ज्यादा संकट में आ सकती है.

अप्रैल में नई चुनौती: यूरोबॉन्ड भुगतान

पाकिस्तान (Pakistan) के सामने सिर्फ यूएई का कर्ज ही नहीं, बल्कि अन्य भुगतान भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं. अप्रैल 2026 में उसे करीब 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान करना है.

इस तरह लगातार बढ़ते भुगतान दायित्वों ने सरकार की आर्थिक रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले समय में नकदी प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है.

रुपये पर दबाव और IMF कार्यक्रम पर असर

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान (Pakistan) को नए विदेशी निवेश या फंडिंग नहीं मिलती, तो उसकी मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है. इससे IMF कार्यक्रम के तहत तय लक्ष्यों को हासिल करना भी मुश्किल हो सकता है. यूएई का यह डिपॉजिट पाकिस्तान के लिए बेहद अहम था, क्योंकि यह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने में मदद करता था. इसके हटने से आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है.

सरकार का दावा: जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान (Pakistan) के वित्त मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि सरकार अपनी सभी बाहरी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार ने कहा है कि वह विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार नजर रख रही है और बाहरी फंड फ्लो को मैनेज करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे.

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