US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान काफी कमजोर हो गया है और बातचीत के लिए उत्सुक है. हालांकि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है. ट्रंप ने कहा, ईरान समझौता करने के लिए बेताब है. साथ ही उन्होंने दोहराया कि तेहरान “परमाणु शक्ति नहीं बन सकता.”
उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा, “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है. उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है… उनके ड्रोन कारखाने लगभग 82 प्रतिशत तक घट गए हैं.” ट्रंप ने जोड़ा कि ईरान के मिसाइल उत्पादन पर भी असर पड़ा है. उन्होंने कहा, “उनके मिसाइल कारखाने लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो गए हैं.”
नेतृत्व अस्थिरता का भी संकेत दिया US Iran War
उन्होंने अमेरिकी अभियान को निर्णायक बताया. उन्होंने कहा कि हमने उनकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. ट्रंप ने ईरान के भीतर नेतृत्व अस्थिरता का भी संकेत दिया. उन्होंने कहा, “हमारे सामने एक समस्या है क्योंकि किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि नेता कौन हैं.” जारी तनाव के बावजूद उन्होंने अमेरिका के मजबूत आर्थिक संकेतकों की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि आज हमने शेयर बाजार में एक नया उच्च स्तर छुआ है.
उन्हें तेल से कोई पैसा नहीं मिल रहा
ट्रंप ने कहा कि बातचीत की स्थिति के बारे में केवल सीमित लोगों को जानकारी है. मेरे और कुछ अन्य लोगों के अलावा किसी को नहीं पता कि बातचीत क्या है. उन्होंने संकेत दिया कि आर्थिक दबाव अमेरिकी रणनीति का मुख्य हिस्सा बना हुआ है. उन्होंने कहा, “उन्हें तेल से कोई पैसा नहीं मिल रहा… नाकाबंदी बेहद कड़ी है.”
ईरान की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है
ट्रंप ने इस संघर्ष को परमाणु प्रसार रोकने के लिए आवश्यक बताया. उन्होंने कहा कि आप ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते. ईरान की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और उनकी अर्थव्यवस्था गिर रही है. यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों, खासकर तेल की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण है, जो मध्य पूर्व में घटनाक्रम से प्रभावित होती हैं. भारत, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान से तेल आयात करता रहा है, ऐसे घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखता है क्योंकि इनका ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है.