US-Iran में भीषण जंग के बीच होर्मुज में फंसे 6000 नाविक, संयुक्त राष्ट्र ने लगाई सुरक्षित निकासी की गुहार

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US-Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 6,000 नाविकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताई है. यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने युद्ध में शामिल सभी देशों से अपील की है कि वे इन संकटग्रस्त सेफायरर्स की सुरक्षित निकासी, वतन वापसी और उन तक जरूरी रसद आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करें.

सुरक्षित बाहर निकालना बेहद जरूरी

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता शबिया मंटू ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसे इन निर्दोष समुद्री कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना और राहत सामग्री पहुंचाना बेहद जरूरी है, जिसके लिए संघर्षरत पक्षों को तुरंत सुरक्षित रास्ता प्रदान करना चाहिए. फारस की खाड़ी के पास करीब 500 जहाजों पर 6,000 से अधिक नाविक फंसे हुए हैं, जो युद्ध और मिसाइल हमलों के खतरे के बीच जीने को मजबूर हैं.

खाने-पीने का पानी, ईंधन और दवाइयां खत्म

कई जहाज मालिकों ने अपने क्रू (कर्मचारियों) को बीच समुद्र या ईरानी बंदरगाहों पर अकेला छोड़ दिया है, जिससे उनके पास खाने-पीने का पानी, ईंधन और दवाइयां खत्म हो रही हैं. पश्चिम एशिया में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा. अमेरिका ने लगातार 13वीं रात भी ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं.

ईरान अभी समझौते के लिए तैयार नहीं

इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान अभी समझौते के लिए तैयार नहीं है और उसे ऐसी ही कार्रवाई की जरूरत है. जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो अमेरिकी ठिकानों पर पहले से ज्यादा ताकतवर पलटवार किया जाएगा. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड सेंटकॉम ने भारतीय समय के मुताबिक सुबह 5 बजे बताया कि ईरान के सैन्य ठिकानों पर एक और दौर की कार्रवाई शुरू की गई.

ईरान से जुड़े सैन्य टार्गेट्स पर हमले

यह लगातार 13वीं रात है जब अमेरिकी बल ईरान से जुड़े सैन्य टार्गेट्स पर हमले कर रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े खतरों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

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