US Israel Frienship: अमेरिका और इजरायल के रिश्तों को आज के जमाने में जय-वीरू की दोस्ती कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. लेकिन छोटा सा यहूदी देश इजरायल आखिर अमेरिका का इतना दुलारा क्यों है. ऐसा क्या है कि अमेरिका इस्लामिक देशों के साथ रूस, चीन जैसी महाशक्तियों से भी इजरायल के लिए टकराने को तैयार है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इजरायल की खातिर यूरोप से अमेरिका के सदियों रिश्तों को भी ताक पर रख दिया. ट्रंप ने अपनी पूरी सियासी पूंजी ईरान के खिलाफ इजरायल के मौजूदा युद्ध में दांव पर लगा दी है. अगर ट्रंप और इजरायल की हार हुई या उन्हें पीछे हटना पड़ा तो ट्रंप के लिए देश में होने वाले मध्यावधि चुनाव में टिक पाना मुश्किल होगा. संसद में बहुमत खोया तो उन्हें महाभियोग का सामना भी करना पड़ सकता है.
अमेरिका-इजरायल की दोस्ती
अमेरिका इजरायल काे मध्य पूर्व में अपना एक ऐसा ‘विमान वाहक पोत’ मानता है जिसे कोई डुबो नहीं सकता.तेल-गैस के भंडार वाले देशों के साथ पूरे खाड़ी क्षेत्र में अपना दबदबा रखता है. इजरायल उसकी आंख और कान बनकर काम करता है. ईरान के साथ बढ़ते टकराव के दौरान इजरायल ने अमेरिकी हितों की रक्षा में ढाल का काम किया है.
हथियारों की टेस्टिंग
अमेरिका इजरायल को हर साल अरबों डॉलर (2026 बजट में 4 अरब डॉलर) की सैन्य सहायता देता है, लेकिन यह पैसा वापस अमेरिका ही आता है. इजरायल इस पैसे से अमेरिकी हथियार खरीदता है. जब इजरायल इन हथियारों को युद्ध जैसे गाजा या लेबनान में इस्तेमाल करता है तो उनका रियल टाइम डेटा अमेरिकी कंपनियों को मिलता है. इससे अमेरिकी हथियारों (जैसे F-35 और मिसाइल डिफेंस) को सुधारने में मदद मिलती है. इजरायल की मिसाइल डिफेंस प्रणाली आयरन डोम में अमेरिका का भी निवेश है.
खुफिया जानकारी में सहयोग
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का नेटवर्क पूरे इस्लामिक देशों में बहुत गहरा है. अमेरिका को कट्टरपंथी संगठनों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जो बारीक जानकारियां इजरायल से मिलती हैं, वे उसे दुनिया की कोई और एजेंसी नहीं दे सकती. यह जानकारी अमेरिका को अपने देश पर होने वाले आतंकी हमलों को रोकने में मदद करती है.
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी
इजरायल को स्टार्टअप नेशन कहा जाता है. इंटेल (Intel), गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर इजरायल में हैं.इजरायली कंपनियों ने अमेरिका में लाखों नौकरियां पैदा की हैं. अमेरिका के आईटी हब सिलिकॉन वैली और इजरायल के बीच अटूट रिश्ता है.
घरेलू राजनीति
अमेरिका में इजरायल समर्थक गुट (Lobbies) बहुत शक्तिशाली हैं.अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (AIPAC) जैसी संस्थाएं अमेरिकी चुनावों में बहुत प्रभाव रखती हैं. कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति या सांसद इजरायल के खिलाफ जाकर अपना राजनीतिक करियर दांव पर नहीं लगाना चाहता.
ईसाई और यहूदियों का रिश्ता
अमेरिका में एक बड़ा वर्ग (ईसाई) धार्मिक मान्यताओं के कारण इजरायल का समर्थन करना अपना पवित्र कर्तव्य मानता है. यहूदियों की हिफाजत करना वो अपना धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानते हैं.
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