अमेरिका की सबसे ज्यादा डिमांड वाली मिसाइल बनाएगा जापान, F-35 जेट में होती है इस्तेमाल

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US Japan AMRAAM: इस समय जापान ऐसा पहला देश होने जा रहा है जो अमेरिकी AIM-120 एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर-यू-एयर मिसाइल का उत्पादन करेगा, इसके लिए अमेरिका और जापान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं, जिसके तहत उत्पादन सुविधा स्थापित की जाएगी. बता दें कि जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजुमी ने 28 अक्टूबर को फिलीपींस के सेबू में अमेरिकी अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बातचीत के बाद इसकी घोषणा की. दोनों की मुलाकात ‘आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस’ से इतर हुई थी.

इस दौरान कोइजुमी ने इसे एक ऐतिहासिक समझौता बताया, जो “न केवल जापान और अमेरिका के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि जापान के रक्षा उद्योग आधार को भी मजबूत करेगा.” AMRAAM अमेरिका की सबसे अधिक मांग वाला बियॉन्ड विजुअल रेंज हथियार है, जिसका इस्तेमाल F-35 लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट में किया जाता है.

क्या है AIM-120 AMRAAM मिसाइल?

  • AIM-120 बियॉन्ड विजुलअ रेंज रडार गाइडेड एयर-टू-एयर मिसाइल है.
  • यह मिसाइल अमेरिकी एयरफोर्स के हथियारों के जखीरे में सबसे लंबी दूरी के हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में से एक है.
  • इसकी गिनती दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एक्टिव रडार-गाइडेड हथियार में होती है.
  • इसे 40 से ज्यादा देशों में एक दर्जन से ज्यादा तरह के एयरक्राफ्ट में लगाया गया है.
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले F-35 स्टील्थ फाइटर जेट में भी इसका इस्तेमाल होता है.
  • F-35 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसे जापानी एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स भी ऑपरेट करती है.
  • एयर-टू-एयर के साथ ही इस मिसाइल को जमीन पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम में भी इस्तेमाल किया जाता है.
  • यूक्रेन में युद्ध के दौरान कई जमीन से हवा में मार करने वाले सिस्टम परखे जा चुके हैं.

दुनिया में हथियारों की कमी के बीच होगा उत्पादन

इस दौरान अमेरिका और जापान के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस समझौते से AMRAAM के इंडस्ट्रियल बेस में विविधता आएगी. साथ ही वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों के लिए क्षेत्रीय भंडार तैयार करने में मदद मिलेगी. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में युद्धों के चलते हथियारों का भंडार कम हुआ है. वहीं, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी तनाव बढ़ रहा है जिसने हथियारों की मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत को बढ़ाने को जरूरत महसूस की जा रही है.

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