जल्द ही पाकिस्तान US समेत इन देशों पर हमला करने में हो सकता है सक्षम, शहबाज के प्लान से अमेरिका की बढ़ी टेंशन

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US-Pakistan Relations: अमेरिका और पाकिस्तान का लंबे समय से संबंध काफी अच्छे रहें है. साल 1971 में भारत-पाकिस्‍तान युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए अपने नौसेना का घातक सातवां बेड़ा भेजा था, लेकिन अब इन दोनों देशों के बीच कुछ खट्टास आती हुई दिखाई दे रही है, क्‍योंकि अमेरिका ने पाकिस्‍तान पर आरोप लगाया है कि वो अमेरिका पर हमला करने के लिए मिसाइल तैयार कर रहा है.

पेंटागन का मानना है कि पाकिस्तान उन कुछ विरोधी देशों की सूची में शामिल होने की कोशिश कर रहा है जिनके पास अमेरिका पर सीधा हमला करने की क्षमता है. माना जा रहा है कि मौजूदा समय में रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास अमेरिका पर सीधा हमला करने की क्षमता है.

अमेरिका ने इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

जानकारों का मानना है कि पाकिस्‍तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम अमेरिका के हितों के खिलाफ है. यही वजह है कि अमेरिका ने कुछ दिन पहले ही इस मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े पाकिस्तान सरकार के राष्ट्रीय विकास परिसर और तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, NDC ने पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए सामग्री प्राप्त करने की कोशिश की है, जिसमें विशेष वाहन चेसिस शामिल है जो बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए लॉन्च समर्थन उपकरणों के लिए जरूरी है.

अमेरिका ने पाकिस्तान के गतिविधियों पर जताई चिंता

ऐसे में अमेरिका के प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस कार्यक्रम में पाकिस्तान के मिसाइल गतिविधियों पर चिंता जताई. उनका कहना है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं, जब पाकिस्‍तान अमेरिका समेत दक्षिण एशिया में कहीं भी हमला करने में सक्षम हो जाएगा. ऐसे में जानकारों का कहना है कि पाकिस्‍तान अमेरिका के लिए एक उभरता हुआ खतरा है.

यह भी पढ़ेंः-TikTok Ban: अमेरिका के बाद अल्बानिया में भी टिकटॉक पर प्रतिबंध, पीएम एडी रामा बोले- केवल कीचड़ और कचरा ही…

Latest News

पाक के स्टेबलकॉइन प्रयोग से और कमजोर हो सकता है पाकिस्तानी रुपया: Report

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा डॉलर-पेग्ड स्टेबलकॉइन अपनाने की योजना से रुपया पर दबाव बढ़ सकता है और मौद्रिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है. IMF और BIS ने भी जोखिमों की चेतावनी दी है.

More Articles Like This

Exit mobile version