अमेरिका-कनाडा के टैरिफ की लड़ाई ने लिया संस्कृति की लड़ाई का रूप, पीएम कार्नी ने लगाया ये आरोप

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US Tariff war: इस समय ट्रेड डील को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर कनाडा है. दरअसल, हाल ही में अमेरिका और कनाडा के बीच किसी तरह की डील के लिए बातचीत पिछले हफ्ते खत्म हो गई थी. ऐसे में अब कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगने का खतरा है.

दरअसल, कनाडा से अमेरिका जाने वाली गाड़ियों पर टैरिफ दोगुना किया जाने वाला है. ऐसे में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी कहा है कि कनाडा भी अमेरिका के टैरिफ का “डॉलर के बदले डॉलर” वसूलकर जवाब देगा. हालांकि इन सबके बीच टैरिफ की इस लड़ाई ने अब संस्कृति की लड़ाई का रूप भी ले लिया है.

फ्रेंच भाषा और क्यूबेक की संस्कृति को लेकर भी मिल रही धमकियाँ

पीएम कार्नी के मुताबिक, कनाडा के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका के साथ विवाद केवल टैरिफ की मांग को लेकर नहीं था. इसमें फ्रेंच भाषा और क्यूबेक की संस्कृति को लेकर ऐसी धमकियां भी शामिल थीं, जिन्हें कनाडा ने स्वीकार नहीं किया.

वैसे तो व्यापारिक बातचीत में आमतौर पर ऐसे मुद्दे नहीं होते, लेकिन कनाडा में ये बहुत भावनात्मक मुद्दे हैं. खासकर क्यूबेक में, जो कनाडा का पूर्वी हिस्सा है और जहां बड़ी संख्या में लोग फ्रेंच भाषा बोलते हैं. क्यूबेक लंबे समय से अपनी अलग पहचान और संस्कृति को बचाने की कोशिश करता रहा है.

कनाडा का आरोप

दरअसल, पीएम कार्नी ने कहा कि बातचीत में कई मुद्दे शामिल थे. इनमें फ्रेंच भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कनाडा की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद, इंटरनेट पर फ्रेंच भाषा वाले मीडिया की भूमिका और कनाडा में बिकने वाले सामान पर अंग्रेजी और फ्रेंच दोनों भाषाओं में जानकारी लिखना शामिल था.

कार्नी ने इन चीजों को बुनियादी अधिकार बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका और कनाडा की सोच में बहुत बड़ा अंतर है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्नी ने यह भी कहा कि अमेरिका कनाडा के ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमिनियम उद्योगों को खत्म करना चाहता है. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका चाहता है कि कनाडा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक समझौतों को सीमित करे.

बता दें कि क्यूबेक में कार्नी के बातचीत खत्म करने के फैसले को काफी समर्थन मिला. एंगस रीड इंस्टीट्यूट की रविवार को जारी एक सर्वे में पाया गया कि क्यूबेक के 85 प्रतिशत लोगों ने इस फैसले का समर्थन किया, जो कनाडा के 10 प्रांतों में सबसे ज्यादा समर्थन था. क्यूबेक की प्रीमियर क्रिस्टीन फ्रेसेट ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा हमारी पहचान पर बातचीत नहीं हो सकती.

किताबों पर लागू नियमों में बदलाव

कनाडाई मीडिया के अनुसार, क्रिस्टीन फ्रेसेट ने कहा कि अमेरिका क्यूबेक के घरेलू उपकरणों और उनके इस्तेमाल की जानकारी वाली किताबों पर लागू नियमों में बदलाव चाहता था. इसके अलावा, अमेरिका क्यूबेक के उस कानून में भी बदलाव चाहता था, जो फ्रेंच भाषा के सांस्कृतिक कंटेंट को बढ़ावा देता है. बता दें कि क्यूबेक में हाल ही में बनाए गए कानून के तहत वहां की सरकार यह तय कर सकती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फ्रेंच भाषा का कितना कंटेटें दिखाया जाए और उसे कितनी प्रमुखता दी जाए. मॉन्ट्रियल गजट के मुताबिक, इससे अमेरिका की कंपनियों के लिए कनाडा में कारोबार करने की लागत बढ़ सकती है.

क्या है अमेरिका का दावा

बता दे कि एक इंटरव्यू में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने व्यापारिक बातचीत में भाषा के मुद्दे को ज्यादा महत्व नहीं दिया. और तो और उन्होंने इसे मजेदार और झूठी कहानी बताया. ग्रीर ने कहा कि “हमें यह पसंद नहीं है कि कनाडा की संघीय सरकार अमेरिकी टेक कंपनियों को अपनी कमाई का एक हिस्सा कनाडा की उन कंपनियों को देने के लिए मजबूर करे, जो उनकी प्रतिस्पर्धी हैं.” हालांकि, उन्होंने कहा, “लेकिन मैं समझता हूं कि क्यूबेक के लोग फ्रेंच भाषा के कंटेंट और इन सभी चीजों को क्यों चाहते हैं. और हमें लगता है कि यह वास्तव में एक बहुत महत्वपूर्ण चीज है.”

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