अमेरिका की ओर से भारत पर एडिशनल टैरिफ हुआ लागू, फार्मा समेत इन सेक्टर पर…

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US Tariffs : आज अमेरिका की ओर से भारत पर एडिशनल टैरिफ लागू हो गया है. ट्रंप के द्वारा इस एडिशनल टैरिफ लगाने से देश के लेबर बेस्ड उद्योग जैसे कपड़ा और रत्न और आभूषण पर मध्यम दबाव पड़ने की संभावना है, इस दौरान स्मार्टफोन और स्टील जैसे उद्योग मौजूदा टैरिफ संरचनाओं और मजबूत घरेलू खपत के कारण टैरिफ के इस प्रभाव से अछूते रहेंगे.

अमेरिका को निर्यात में होगा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ से अमेरिकी GDP पर 40-50 आधार अंकों का असर पड़ सकता है. इस मामले को लेकर रिपोर्ट में कहा गया कि “50 फीसदी टैरिफ के कारण 45 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होने के साथ सबसे खराब स्थिति में, भारत का व्यापार अधिशेष व्यापार घाटे में बदल जाएगा. फिर भी लोगों का कहना है कि व्यापार वार्ता से विश्वास बहाल होगा और अमेरिका को निर्यात में सुधार होगा.”

अमेरिका पने दिया दवा आयात को छूट

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार टैरिफ के चलते अमेरिका ने भारत से दवा आयात को छूट दे दी है. बता दें कि 2025 में अमेरिका के कुल दवा आयात में 6 प्रतिशत तक भारत की हिस्सेदारी रही और वित्त वर्ष 25 में भारत के दवा निर्यात का 40 प्रतिशत अमेरिका को दर्ज किया गया. इस बीच, हाल के टैरिफ और कमजोर डॉलर के प्रभाव से अमेरिका में ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे आयात-संवेदनशील क्षेत्रों में दिखने लगे हैं.

इन देशों को होगा फायदा

जानकारी के मुताबिक अमेरिका के उच्च टैरिफ के बीच, भारत के उत्पाद प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता खो सकते हैं, ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इससे चीन और वियतनाम को लाभ होगा. इसका मुख्‍य कारण है कि सभी अन्‍य देशों भारत पर ज्‍यादा टैरिफ लगाया गया है. जानकारी देते हुए बता दें कि टैरिफ रेट चीन के लिए 30 प्रतिशत, वियतनाम के लिए 20 प्रतिशत, इंडोनेशिया के लिए 19 प्रतिशत और जापान के लिए 15 प्रतिशत है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वस्त्र निर्यात गंतव्य बना हुआ है. पिछले पांच वर्षों में, भारत ने कपड़ों के बाजार हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि की है वहीं भारत के मुकाबले चीन की हिस्सेदारी में गिरावट आई है.

अमेरिका रत्न और आभूषण का सबसे बड़ा बाजार

बता दें कि यह बदलाव अमेरिकी सप्लाई चेन व्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाता है. अमेरिका रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जो कि क्षेत्र के 28.5 अरब डॉलर के वार्षिक निर्यात का एक तिहाई हिस्सा है. जानकारी देते हुए बता दें कि अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत होने के साथ, निर्यातक महत्वपूर्ण व्यवधान के लिए तैयार हैं.

 

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