अमेरिका ने Infosys-Wipro समेत कई कंपनियों को PERM प्रोग्राम से किया निलंबित, Microsoft ने पेश की सफाई, जानिए H 1B वीजा को लेकर क्या है ट्रंप सरकार की रणनीति 

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Visa Crackdown: अमेरिकी श्रम विभाग ने इमीग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने Microsoft, Adobe, Infosys, Wipro, HCL, TCS, Cognizant और Capgemini जैसी प्रमुख कंपनियों को PERM (Permanent Labour Certification Program) से निलंबित कर दिया है. दरअसल, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच चल रही है.

अमेरिका के इस कार्रवाई के दौराान Microsoft ने अपने बचाव में कहा कि अमेरिका में उसके अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी नागरिक हैं और पिछले वर्ष दायर H-1B आवेदनों में से अधिकांश मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने के लिए थे. फिलहाल, अमेरिका के इस कदम से आईटी उद्योग और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

शेयर बाजार में दिखा असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्रवाई की घोषणा के बाद अमेरिकी बाजार में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर पर दबाव देखने को मिला. Wipro के एडीआर में गिरावट दर्ज की गई, जबकि Infosys और Cognizant के शेयर भी कमजोर रहे. इसके अलावा, तकनीकी शेयरों में बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया. Wipro के ADRs 2.4 प्रतिशत गिरकर 1.63 डॉलर पर पहुंच गए, जबकि इंफोसिस के ADRs 3.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10.14 डॉलर पर कारोबार कर रहे थे. वहीं कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई और इसका शेयर 3.08 प्रतिशत गिरकर 54.70 डॉलर पर आ गया.

माइक्रोसॉफ्ट का जवाब आया सामने

ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई के बाद Microsoft ने सफाई पेश करते हुए आधिकारिक बयान में कहा कि उसे अमेरिकी कार्यबल की क्षमता और प्रतिभा पर पूरा भरोसा है. Microsoft ने कहा कि ‘हम अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा में विश्वास करते हैं. यही कारण है कि अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी हैं.’

साथ ही कंपनी ने ये भी कहा कि वह प्रशासन को अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है. Microsoft के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में दायर लगभग 6,000 H-1B वीजा आवेदनों में से करीब 80 प्रतिशत आवेदन नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए नहीं बल्कि पहले से कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने के लिए थे. इतना ही नही कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी H-1B आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में मौजूद थे और बाद में Microsoft से जुड़े.

वेतन को लेकर भी दी सफाई

रिपोर्ट्स के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन देकर नौकरी पर रखा जाता है. कंपनी ने कहा कि वह टेक्नोलॉजी सेक्टर में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी वेतन देने वाली कंपनियों में शामिल है. ऐसे में H-1B कर्मचारियों को भी वही वेतन दिया जाता है जो समान कार्य करने वाले अन्य कर्मचारियों को मिलता है. Microsoft ने कहा कि उसका उद्देश्य दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी कार्यशक्ति तैयार करना है, जिसके लिए अमेरिकी प्रतिभाओं को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को भी आकर्षित किया जाता है.

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