Washington: कैलिफोर्निया में पुलिस ने भारतीय मूल के 44 वर्षीय अमेरिकी नागरिक महेंद्र मखीजानी को लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने बीमा पॉलिसी से जुड़े स्वामित्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया. कैलिफोर्निया सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के प्रथम सहायक अमेरिकी अटॉर्नी बिलाल एस्सायली ने बताया कि ग्रीन कार्ड धारक मखीजानी को बुधवार सुबह संघीय आपराधिक शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया.
अधिकतम 30 वर्ष की जेल
दोषी पाए जाने पर उसे अधिकतम 30 वर्ष की जेल हो सकती है. वह अमेरिका में कोरोना डेल मार में रह रहा था. अमेरिकी कर विभाग की आपराधिक जांच शाखा के लॉस एंजिलिस फील्ड कार्यालय में कार्यवाहक विशेष एजेंट प्रभारी डैरेन लियान ने कहा कि मखीजानी ने कथित तौर पर स्वामित्व बीमा रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया, वास्तविक गिरवी अधिकार को छिपाया और कई फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर एक संघीय बैंक को लगभग 10 करोड़ डॉलर का चूना लगाया.
देश की बैंकिंग व्यवस्था के खिलाफ
बुधवार को जारी बयान में एस्सायली ने कहा कि यह गिरफ्तारी देश की बैंकिंग व्यवस्था के खिलाफ खतरों से निपटने के लिए उनके कार्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. शिकायत के साथ दाखिल शपथपत्र के अनुसार, मखीजानी न्यूपोर्ट बीच स्थित कंपनी कैंटर ग्रुप वी एलएलसी को नियंत्रित करता है, जिसका एक बैंक के साथ ऋण संबंध था. समझौते के तहत बैंक ने कैंटर को रियल एस्टेट द्वारा सुरक्षित ऋण जारी करने या खरीदने के लिए लगभग 10 करोड़ डॉलर उपलब्ध कराए थे.
संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी
इसके बदले कैंटर को उन ऋणों और उनसे जुड़ी संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखना था तथा ऋण से प्राप्त राशि के जरिए बैंक का भुगतान करना था. सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच मखीजानी ने कथित रूप से बीमा पॉलिसी में फर्जी बदलाव कर यह दर्शाया कि संबंधित अचल संपत्तियों पर कैंटर का पहला गिरवी अधिकार है. फर्जी पॉलिसी तैयार करने के बाद मखीजानी ने अपने तत्कालीन कर्मचारी के माध्यम से उन्हें बैंक को जमा कराया.
कई टेलीकॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा
आरोप है कि उसने बैंक अधिकारियों के साथ कई टेलीकॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया और बैंक द्वारा उठाए गए स्वामित्व संबंधी मुद्दों पर झूठी जानकारी दी.
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