New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तवाव के बीच ट्रंप ने एक बडा फैसला कर मिडिल ईस्ट में कोहराम मचा दिया है. दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड को कैरेबियन सागर से मध्य पूर्व की ओर रवाना होने का आदेश दिया गया है. बता दें कि यह वही एयरक्राफ्ट कैरियर है जो अभी तक वेनेजुएला के पास तैनात था.
संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार
वेनेजुएला पर हमला करने और निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने से पहले ट्रंप ने इसे कैरेबियन में तैनात किया था. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं. इसी दबाव की रणनीति के तहत यह फैसला लिया गया है. इसी के साथ ही मिडिल ईस्ट में अब अमेरिका के दो विमानवाहक पोत तैनात हो जाएंगे.
सैन्य ताकत और दबाव दोनों बढ़ेंगे
इससे पहले यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ तीन गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज दो हफ्ते पहले ही क्षेत्र में पहुंच चुके हैं. दो बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की मौजूदगी से अमेरिका की सैन्य ताकत और दबाव दोनों बढ़ेंगे. USS जेराल्ड आर. फोर्ड को अक्टूबर में भूमध्यसागर से हटाकर कैरेबियन क्षेत्र में भेजा गया था.
ईरान को लेकर अमेरिका की चिंता गंभीर
उस समय प्रशासन ने पश्चिमी गोलार्ध में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई थी. अब अचानक इसे मध्य पूर्व भेजने का फैसला यह दिखाता है कि ईरान को लेकर अमेरिका की चिंता गंभीर हो गई है. ट्रंप ने इस हफ्ते एक और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने की संभावना पर भी चर्चा की थी. यह कदम ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के लिए दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
तैनाती को आठ महीने पूरे
यूएसएस फोर्ड जून 2025 के अंत में तैनाती पर निकला था. दो हफ्तों में उसकी तैनाती को आठ महीने पूरे हो जाएंगे. अब अगर उसे लंबे समय तक मध्य पूर्व में रहना पड़ा तो यह उसके क्रू के लिए असामान्य रूप से लंबी तैनाती होगी. यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव बना हुआ है. ट्रंप प्रशासन पहले ही ईरान को कड़ा संदेश दे चुका है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो कड़े कदम उठाए जाएंगे.
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