Washington: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ राष्ट्रपति उम्मीदवार रहे भारतवंशी नेता व ओहायो राज्य में गवर्नर पद के दावेदार विवेक रामास्वामी ने नए साल 2026 में सोशल मीडिया से दूरी बना लिया है. हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखे अपने लेख में विवेक रामास्वामी ने बताया कि चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल उनकी टीम करेगी जबकि वे खुद जमीन पर उतरकर सीधे मतदाताओं से संवाद करेंगे. उनका मानना है कि यह तरीका उन्हें अधिक संतुष्टि और खुशी देगा.
अपने फोन से एक्स और इंस्टाग्राम कर दिए डिलीट
उनका यह फैसला चर्चा में है. उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखे अपने लेख में बताया कि नए साल के संकल्प के तहत वे 2026 में सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखेंगे. उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा कि मैं 2026 में सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहने का फैसला कर चुका हूं. नए साल की पूर्व संध्या पर मैंने अपने फोन से एक्स और इंस्टाग्राम डिलीट कर दिए. अपने संदेश को फैलाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने और लगातार ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं को अपने संदेश को बदलने देने के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है.
नस्लवादी गालियों और उससे भी बदतर चीजों की बाढ़ देखी
यह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना नहीं है बल्कि सोशल मीडिया को आपको इस्तेमाल करने देना है. विवेक रामास्वामी ने लिखा कि 2025 में मैंने सोशल मीडिया पर नस्लवादी गालियों और उससे भी बदतर चीजों की बाढ़ देखी. लेकिन उसी साल मैंने ओहायो के सभी 88 काउंटियों में शहरों से लेकर खेतों तक यूनियन हॉल से फैक्ट्रियों तक रिपब्लिकन रैलियों से लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ आमने-सामने की बातचीत तक दसियों हजार मतदाताओं से मुलाकात की और पूरे साल मुझे एक भी ओहायो मतदाता से कोई कट्टर या नस्लवादी टिप्पणी सुनने को नहीं मिली.
रिपब्लिकन पार्टी से विवेक रामास्वामी ने ठोकी थी दावेदारी
डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए रिपब्लिकन पार्टी से विवेक रामास्वामी ने दावेदारी ठोकी थी. हालांकि बाद में ट्रंप ने उनके खिलाफ खड़े सभी लोगों को हरा दिया. ट्रंप ने पार्टी के लिए फंड भी सबसे ज्यादा इकट्ठा किया था, इसमें रामास्वामी पिछड़ गए थे. उन्होंने लिखा कि सोशल मीडिया एक लुभावना विकल्प देता है मुफ्त और भरपूर रियल-टाइम फीडबैक.
सबसे ज्यादा नकारात्मक और उग्र संदेश
इससे ऐसा लगता है कि आप सीधे लोगों की आवाज सुन रहे हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहे हैं. लेकिन आधुनिक सोशल मीडिया तेजी से वास्तविक मतदाता वर्ग से कटता जा रहा है. सबसे ज्यादा नकारात्मक और उग्र संदेश ही सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं क्योंकि उन्हें ज्यादा लाइक्स और पोस्ट मिलते हैं और यही सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कमाई का जरिया बनता है.
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