War with America : लंबे समय से अमेरिका से जंग के बीच ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री लावरोव से फोन पर बात की है. बता दें कि इसकी जानकारी खुद एस जयशंकर ने दी. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने जयशंकर को ऐसे समय पर फोन लगाया है जब डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा.
शांति-स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर जोर- एस जयशंकर
ऐसे में एस जयशंकर ने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट के दौरान लिखा कि ‘ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया. मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई.’ इसके साथ ही नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा की.
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर जोर दिया और कहा कि भारत युद्ध को रोकने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही कोशिशों का समर्थन करता है.
अराघची ने अमेरिका को दी चेतावनी
इस मामले को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से बात की और कहा कि इजरायल और अमेरिका औद्योगिक ढांचों, फैक्ट्रियों, अस्पतालों, स्कूलों, रिहायशी इलाकों और परमाणु केंद्रों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े प्रभावशाली देशों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर जिम्मेदार रवैया अपनाएं. साथ ही अराघची ने चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल के हमलों का असर पूरे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा पर पड़ सकता है.
अराघची ने रूसी विदेश मंत्री से की बात
इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने वर्तमान में चल रहे संघर्ष और हमलों के बारे में जानकारी दी. बता दें कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत के दौरान रूस ने अमेरिका के लिए एक अल्टीमेटम जारी किया है. ऐसे में सर्गेई लावरोव ने उम्मीद जताते हुए कहा कि युद्ध को कम करने की कोशिशें कामयाब होंगी और कहा कि अमेरिका ‘अल्टीमेटम की भाषा छोड़कर और स्थिति को बातचीत के रास्ते पर वापस लाकर’ मदद कर सकता है.
इन देशों के जहाजों को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति
मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान द्वारा बंद किए जाने के बाद तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है. जानकारी के मुताबिक, पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है. ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है. ऐसे में भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.
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