वजू में बर्बाद न करें पानी, सिर्फ 2 बार धुलें चावल…पानी की कमी से जूझ रहे ब्रिटेन सरकार ने लोगों से की ये अपील

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Water Crisis UK: इंग्लैंड इस समय पानी की भारी किल्लतों से जूझ रहा है, समस्या इतनी बढ़ गई है कि अब सरकार और पानी की कंपनियां लोगों की आदतों में भी बदलाव की अपील कर रही हैं. दरअसल, दक्षिण एशियाई यानी देसी परिवारों से कहा गया है कि वे चावल को 5-7 बार धोने के बजाय सिर्फ दो बार ही साफ करें. दावा है कि इससे हर बार चावल बनाते समय करीब 5 लीटर पानी बचाया जा सकता है.
बता दें कि इस कैंपेन पर करीब 2.7 लाख पाउंड खर्च किए जा रहे हैं. इसका मकसद अलग-अलग समुदायों के लोगों को पानी बचाने के आसान तरीके बताना है. इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से पहले किए जाने वाले वजू में भी कम पानी इस्तेमाल की बात कही गई है. लेकिन अब इस पैसे और इस मुहिम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

चावल धोने की आदत पर क्यों नजर?

दरअसल, इंग्लैंड के कई हिस्से इस समय सूखे की मार झेल रहे हैं. कई इलाकों में नदियों और जलाशयों का पानी कम हो रहा है. ऐसे में पानी की कंपनियां घरों में पानी की खपत कम करने के तरीके बता रही हैं. इस मुहिम का कहना है कि कुछ दक्षिण एशिया परिवार कच्चे चावल को 5 से 7 बार बहते पानी में धोते हैं, जिसे कम करने की सलाह दी गई है. लोगों से कहा गया कि चावल को सिर्फ 2 बार धोने से हर बार करीब 5 लीटर पानी बच सकता है. वहीं, चावल धोने के बाद बचे पानी को फेंकने के बजाय पौधों में डालने का सुझाव भी दिया गया है.

मुस्लिमों को खास निर्देश

इसके अलावा, इस मुहिम में मुस्लिम समुदाय को भी शामिल किया गया है. कैंब्रिज सेंट्रल मस्जिद के साथ मिलकर लोगों को वुजू के दौरान पानी बचाने का तरीका बताया गया. कहा गया है कि नल खुला छोड़कर वुजू करने के बजाय एक लीटर का जग इस्तेमाल करें. लगातार नल चलाकर वुजू करने में एक बार में करीब 6 से 12 लीटर पानी खर्च हो सकता है.

खर्च पर उठे सवाल

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