New Delhi: खाड़ी के शक्तिशाली देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच टकराव और बढ़ सकता है. बता दें कि यमन के अलगाववादियों ने शुक्रवार को दक्षिण में एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए संविधान का ऐलान किया और युद्धग्रस्त देश के अन्य गुटों से इसे स्वीकार करने को भी कहा. संयुक्त अरब अमीरात समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने इसे दक्षिण की स्वतंत्रता की घोषणा के रूप में चित्रित किया लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस कदम को वास्तव में लागू किया जा सकेगा या यह केवल प्रतीकात्मक होगा.
सभी सैनिकों को पूरी तरह से वापस बुलाया
संयुक्त अरब अमीरात ने घोषणा की कि उसने यमन से अपने सभी सैनिकों को पूरी तरह से वापस बुला लिया है. संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार सुबह घोषणा की कि यमन से उसके सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हालांकि मंत्रालय ने स्थानांतरित किए गए सैनिकों और उपकरणों की संख्या के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.
दक्षिण के दो प्रांतों का नियंत्रण
इससे पहले STC से जुड़े लड़ाकों ने सऊदी समर्थित बलों से दक्षिण के दो प्रांतों का नियंत्रण पिछले महीने अपने हाथ में ले लिया था और दक्षिण के प्रमुख शहर अदन में राष्ट्रपति भवन पर भी कब्जा कर लिया था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सदस्य सऊदी अरब की राजधानी रियाद भाग गए. सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को दक्षिणी यमन में संयुक्त अरब अमीरात समर्थित बलों पर हमले किये.
STC के कब्जे वाले शिविरों एवं सैन्य ठिकानों पर बमबारी
एक अलगाववादी नेता ने बताया कि शुक्रवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने हद्रामौत प्रांत में STC के कब्जे वाले शिविरों एवं सैन्य ठिकानों पर बमबारी की और सऊदी समर्थित लड़ाकों ने इन ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश की. सऊदी अरब ने हाल के सप्ताह में STC बलों पर कई बार बमबारी की है और अलगाववादियों के लिए भेजे जा रहे अमीराती हथियारों की खेप पर हमला किया है. पिछले महीने एसटीसी द्वारा यमन के हद्रामौत और महरा प्रांतों में प्रवेश किए जाने और तेल समृद्ध क्षेत्र पर कब्जा किए जाने के बाद सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव बढ़ गया.
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