प्रतिष्ठा- द्वादशी पर जन्मभूमि परिसर में युगकवि डॉ. कुमार विश्वास की पहली राग सेवा से गदगद हुए रामभक्त

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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अयोध्या में आज से श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की पहली वर्षगांठ मनायी जा रही है। प्रतिष्ठा द्वादशी के नाम से आयोजित हुए इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शनिवार को देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुँचे। इस विशेष अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में आज दोपहर सुप्रसिद्ध कवि व प्रसिद्ध रामकथा मर्मज्ञ डॉ. कुमार विश्वास ने मंदिर के गर्भगृह में रामलला की राग-सेवा की। डॉ. विश्वास ने राग सेवा के दौरान सबसे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व महासचिव श्री चंपत राय के साथ मंदिर गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने के उपरांत वहीं बैठकर भगवान के सम्मुख अनेकों स्वरचित भजनों को गाकर सुनाया।
मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम की पहली राग सेवा के अवसर पर मंदिर में दर्शनार्थ पधारे सभी श्रद्धालुओं में ज़बरदस्त उत्साह देखने को मिला। कुमार विश्वास ने अपनी राग-सेवा के क्रम में जब “राम सृष्टा भी हैं, राम सृष्टि भी हैं” सुनाया तो मंदिर प्रांगण में उपस्थित सभी लोग उनके साथ ही गुनगुनाने लगे।
उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति के दौरान भक्तों की ऑंखें लगातार भीगती नज़र आयी,साथ ही साथ डॉ. विश्वास कभी कई बार भावुक होते दिखाई पड़े।इस महत्वपूर्ण अवसर पर संत समाज के कई प्रतिनिधि व्यक्तित्वों की भी गरिमामयी उपस्थिति पूरे समय बनी रही। कार्यक्रम के दौरान डॉ॰ कुमार विश्वास जी के साथ प्रसिद्ध संत मिथिलेशनंदिनी शरण जी महाराज भी उपस्थित रहे।
राग सेवा के समापन पर डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि आज हमलोग  सैकड़ों वर्षों की प्रतीक्षा के पूर्णता-पर्व की वर्षगांठ मना रहे हैं। आज अवधबिहारी से बस इतनी प्रार्थना है कि जल्दी ही हमें इसी प्रकार कुंज बिहारी श्रीकृष्ण भगवान के पुण्य परिसर में भी ऐसा ही उत्सव मनाने का सौभाग्य मिले। विदित हो कि डॉ.कुमार विश्वास विश्व के सबसे महंगे और लोकप्रिय कवि होने के साथ-साथ प्रसिद्ध रामकथा मर्मज्ञ भी हैं तथा देश विदेश में अपने-अपने राम व अपने-अपने श्याम के नाम से आयोजित ऊर्जा-सत्रों में इन्हें सुनने के लिए हज़ारों लोग उपस्थित होते हैं।
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