अमेरिका में R&AW पर बैन लगाने की उठी मांग, भारत पर क्या होगा इसका प्रभाव?

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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R&AW: अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के खिलाफ प्रतिबंधों की मांग की है. आयोग द्वारा सिख अलगाववादियों के खिलाफ हत्या की साजिश में कथित संलिप्तता को लेकर यह मांग की है.

रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार बदतर होता जा रहा है. ऐसे में पैनल ने अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के वजह से भारत को “विशेष चिंता का देश” घोषित करने का भी आग्रह किया. हालांकि भारत ने अभी तक इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

विशेष चिंता का देश भारत और वियतनाम

दरअसल, आयोग ने कम्युनिस्ट शासन द्वारा शासित वियतनाम पर भी निशाना साधा, जो कथित तौर पर धार्मिक मामलों को विनियमित और नियंत्रित करने के प्रयासों को बढ़ा रहा है. ऐसे में पैनल का कहना है कि भारत की तरह वियतनाम को भी विशेष चिंता का देश घोषित किया जाए, जिसके साथ वाशिंगटन चीन के बारे में साझा चिंताओं के कारण संबंधों को मजबूत करना चाहता है.

भारत के मानवाधिकारों के मुद्दों को किया जा रहा नजरअंदाज

जानकारों का मानना है कि अमेरिका लंबे समय से भारत को एशिया और अन्य क्षेत्रों में चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति संतुलन के रूप में देखता रहा है, और यही वजह है कि भारत में मानवाधिकारों के मुद्दों को नजरअंदाज किया जाता रहा है. हालांकि ट्रंप प्रशासन द्वारा R&AW पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना नहीं है, क्योंकि पैनल की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं.

भारत-अमेरिका के बीच तनातनी

दरअसल, साल 2023 से  भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा द्वारा आरोप लगाया गया कि भारत में सिख अलगाववादियों को निशाना बनाया है. भारत-अमेरिका संबंधों तनातनी तब देखने को मिली जब वाशिंगटन ने खालिस्तान समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की नाकाम साजिश के सिलसिले में पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकास यादव पर आरोप लगाया.

अमेरिकी आयोग ने भाजपा पर लगाए ये आरोप

अमेरिकी आयोग ने अपने रिपोर्ट में कहा कि साल 2024 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब होती रहेगी, क्योंकि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले और भेदभाव बढ़ता रहेगा. साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान “मुसलमानों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणित बयानबाजी और गलत सूचना का प्रचार किया.

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