New Delhi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात से पहले ईरान ने विस्फोटक दांव चल दिया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारी मोहम्मद अकबरजादा ने ऐलान किया है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य केवल कुछ द्वीपों तक सीमित नहीं रहेगा. अब इसका विस्तार दक्षिण-पूर्वी ईरान के जास्क तट से लेकर ग्रेटर टुनब द्वीप तक होगा. जास्क असल में फारस की खाड़ी के बाहर ओमान की खाड़ी में है.
ऑपरेशनल जोन को सैकड़ों मील आगे बढ़ाया
इसका मतलब यह है कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय पानी को अपनी जागीर बताते हुए अपने ऑपरेशनल जोन को सैकड़ों मील आगे बढ़ा दिया है. अब जो भी टैंकर वहां से गुजरेगा, उसे ईरान की बंदूकों की नोक से होकर गुजरना होगा. अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही ईरान की जंग ने पहले ही इस रास्ते को किलर जोन बना दिया है. तेल टैंकर अब इस रास्ते पर जाने से डर रहे हैं. जहाजों को अब अरब प्रायद्वीप का पूरा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है.
चीन की फैक्ट्रियों में लग जाएगा ताला
बीजिंग अपनी जरूरत का 12% तेल अकेले ईरान से लेता है. तेल की सप्लाई रुकने का मतलब है चीन की फैक्ट्रियों में ताला लग जाएगा. इस वजह से शी जिनपिंग जबरदस्त दबाव में हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे ट्रंप का स्वागत करें या ईरान की इस नई सिरदर्दी से निपटें. बता दें कि पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त बीजिंग पर टिकी हुई हैं, जहां ट्रंप का विमान उतरने वाला है. ट्रंप और शी जिनपिंग की इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान कई ग्लोबल मुद्दों पर बात होने वाली है.
एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल
ईरान ने इस घोषणा के लिए उस वक्त को चुना जब ट्रंप हवा में थे और बीजिंग पहुंचने वाले थे. ये एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है. ईरान किसी समिट के नतीजों का इंतजार नहीं करेगा. चीन अब हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकता, उसे ईरान के लिए ट्रंप से डील करनी ही होगी.
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