‘भाजपा को दुर्गंध पसंद है…’, अखिलेश के बयान पर हंगामा, बीजेपी नेताओं ने अपने बयानों से घेरा

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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UP News: यूपी की राजनीति में लगातार बयानबाजी का दौर बढ़ता जा रहा है. राज्य के कन्नौज जिले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गौशाला को लेकर ऐसा बयान दे दिया है, जिससे हंगामा खड़ा हो गया है. अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा वाले दुर्गंध पसंद करते हैं, इसलिए गौशाला बना रहे हैं और हम सुगंध पसंद कर रहे थे, इसलिए इत्र पार्क बना रहे थे. अखिलेश के इस बयान के बाद अब भाजपा के नेताओं ने भी सपा अध्यक्ष पर पलटवार करना शुरु कर दिया हैं.

जाने क्या बोले अखिलेश यादव?

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “समाजवादी लोग विकास और खुशहाली चाहते हैं. कन्नौज में रहकर हम लोगों ने भाईचारे की सुगंध दी है. भाजपा के लोग हैं उनकी नफरत की दुर्गंध है. मैं कन्नौज के सुगंध वाले लोगों से कहूंगा कि ये भाजपा के दुर्गंध को हटाएं. अभी तो थोड़ी हटाई है, अगली बार और हटा दो जिससे की कन्नौज का रुका हुआ विकास आगे बढ़ जाए. दुर्गंध पसंद करते हैं, इसलिए गौशाला बना रहे हैं. हम सुगंध पसंद कर रहे थे इसलिए इत्र पार्क बना रहे थे. हम लोग सुगंध पसंद करने वाले लोग हैं, इसलिए परफ्यूम पार्क बना रहे हैं. ये दुर्गंध वाले लोग हैं.”

गोबर से दुर्गंध आने लगे तो अकाल तय केशव प्रसाद मौर्य

अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा अध्यक्ष पर बड़ा पलटवार किया है. डिप्टी सीएम ने कहा- “किसान, ख़ासकर ग्वाल के बेटे को अगर गाय के गोबर से दुर्गंध आने लगे तो समझना चाहिए कि वह अपनी जड़ों और समाज से पूरी तरह कट चुका है. कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने लिखा था कि किसान के बेटे को अगर गोबर से दुर्गंध आने लगे तो अकाल तय है. सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव को भी गोबर से दुर्गंध आ रही है, उनकी पार्टी का समाप्त वादी में तब्दील होना तय है.”

अखिलेश को सांसद संबित पात्रा ने दिया जवाब

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कहा, “ये सभी पार्टियां सनातन के विरोध में आवाज उठाती रहती हैं. अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा को दुर्गंध पसंद है, इसलिए वह गौशाला का निर्माण करा रही है और सपा को सुगंध पसंद है, इसलिए वे इत्र बनाते हैं. यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि इन लोगों को सनातन से लगाव नहीं है और ये सभी सनातन विरोधी हैं. अगर हिंदुस्तान में रहकर कोई सनातन का विरोध करता है, तो उसे हिंदुस्तान में राजनीति बंद कर देनी चाहिए. उसे वह भूमि ढूंढ़नी चाहिए, जहां सनातन का अपमान हो सके. यह देश सनातन का अपमान नहीं सहेगा.”

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