PM मोदी के भाषण से पाकिस्तान को लगी मिर्ची, परमाणु हथियारों को लेकर फिर नया राग अलाप रहे ख्वाजा आसिफ

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Pakistan Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की. उनके भाषण में पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि जैसे विषय प्रमुख रहे. इस दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि भारत अब किसी भी प्रकार की धमकी या ब्लैकमेलिंग सहन नहीं करेगा. प्रधानमंत्री के इस बयान पर पाकिस्‍तान तिलमिला उठा.

ऐसे में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने परमाणु हथियारों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु बम केवल आत्मरक्षा के लिए है और इसका किसी भी तरह के ब्लैकमेल या दबाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

पाकिस्तान ने हमेशा आत्मरक्षा में लड़ा युद्ध

ख्वाजा आसिफ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “हम अपनी परमाणु संपत्तियों से किसी को धमकी नहीं देते. यह पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी है. पाकिस्तान ने हमेशा आत्मरक्षा में युद्ध लड़ा और जीत हासिल की, जबकि भारत के अंदर वर्तमान राजनीतिक हालात अलग चुनौती पेश कर रहे हैं.

भारत के विपक्षी नेताओं को बनाया मुद्दा, लगाया ये आरोप

ख्वाजा आसिफ ने भारत के विपक्षी नेताओं के बयान को अपने तर्क में जोड़ते हुए कहा कि “भारत में नागरिकों और विपक्षी नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है, जो मानते हैं कि मोदी का रवैया क्षेत्रीय तनाव बढ़ा रहा है.” इसके अलावा, ख्वाजा आसिफ ने भारत पर फिर से आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद बढ़ाने के पीछे भारत का हाथ है. साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तान में सक्रिय तालिबान जैसे समूहों को भारत से जुड़े होने का दावा किया. उनका कहना था कि पाकिस्तान के पास इसके स्पष्ट सबूत हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा किया गया है.

अपनी ही करनी का फल भुगत रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा और पत्रकार आरजू काजमी ने मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी का कठोर रुख अपेक्षित था, क्योंकि पाकिस्तान की ओर से लगातार धमकियां दी जाती रही हैं. आरजू काजमी के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा दी जा रही बातचीत का ऑफर केवल तभी सार्थक होगा जब वह आतंकियों के मामलों पर गंभीर कदम उठाए.

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