Ulcer Home Remedies: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. सुबह की जल्दबाजी, दोपहर का काम का तनाव और रात को थककर जो कुछ भी मिल जाए उसे खाकर सो जाना आदत बन चुकी है. इस असंतुलित जीवनशैली का सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है, जिससे कई बीमारियों की शुरुआत होती है. इन्हीं में से एक है पेट का अल्सर.
अल्सर क्या है?
आधुनिक चिकित्सा के अनुसार, पेट की अंदरूनी परत में घाव बन जाना अल्सर कहलाता है. वहीं आयुर्वेद इसे सिर्फ शारीरिक रोग नहीं, बल्कि शरीर और मन के असंतुलन का संकेत मानता है.
कैसे होता है अल्सर?
आयुर्वेद के मुताबिक, जब पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है और पित्त दोष बढ़ जाता है, तो यह पेट की नाजुक परत को क्षतिग्रस्त करने लगता है. इससे धीरे-धीरे घाव बनते हैं, जिन्हें ‘परिणाम शूल’ या ‘अन्नवह स्रोतों का विकार’ कहा गया है.
कारण: दिनचर्या और मानसिक स्थिति
बार-बार चाय-कॉफी पीना, बासी और तीखा खाना, खाली पेट रहना, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव व गुस्सा— ये सभी पित्त को बढ़ाने वाले कारण हैं. चरक संहिता में इसे बीमारी का बीज कहा गया है जो धीरे-धीरे अल्सर में बदल जाता है.
अल्सर के लक्षण
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पेट के ऊपरी हिस्से में जलन या दर्द
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खाना खाने के बाद भारीपन और एसिडिटी
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खट्टी डकारें, मतली या उल्टी
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गंभीर मामलों में खून की उल्टी या काला मल
समाधान: जीवनशैली में बदलाव और आयुर्वेदिक उपाय
आधुनिक दवाएं जैसे एंटासिड और एंटीबायोटिक्स तुरंत राहत देती हैं, लेकिन समस्या की जड़ पर असर नहीं करतीं. वहीं आयुर्वेद जीवनशैली में बदलाव, शरीर के दोषों को संतुलित करने और अग्नि को मजबूत करने पर बल देता है.
आयुर्वेदिक घरेलू उपचार
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मुलेठी चूर्ण: गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से पेट को राहत
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शुद्ध देसी घी: पित्त को शांत करता है और घाव भरता है
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एलोवेरा जूस और आंवला: आंतरिक शीतलता और ऊर्जावान पाचन
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नारियल पानी और धनिया-सौंफ का पानी: पेट को ठंडक और ताजगी
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शतावरी चूर्ण: पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है
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