वायु प्रदूषण खतरनाक! हार्ट अटैक-स्ट्रोक के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी, ऐसे करें बचाव

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HealthTips: देश में बढ़ता वायु प्रदूषण जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है. इससे दिल की बीमारियों, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. एयर पॉल्यूशन केवल फेफड़ों के लिए ही नहीं बल्कि दिल और दिमाग के लिए भी खतरनाक है. अक्सर लोग इसे सिर्फ सांस से जुड़ी बीमारियों जैसे अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से जोड़ते हैं, लेकिन सच यह है कि गंदी हवा हमारे दिल की धड़कनों तक को प्रभावित कर सकती है.

बाल से भी 30 गुना पतले होते हैं सबसे खतरनाक PM2.5 कण

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं तो उसके साथ हमारे शरीर में कई हानिकारक कण (Pollutants) प्रवेश करते हैं. इनमें सबसे खतरनाक PM2.5 कण होते हैं जो बाल से भी 30 गुना पतले होते हैं. ये इतने छोटे होते हैं कि शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को पार कर सीधे फेफड़ों से खून में पहुंच जाते हैं. एक बार जब ये रक्त प्रवाह में पहुंचते हैं तो शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डालना शुरू कर देते हैं. खासकर दिल और दिमाग पर इनका गहरा प्रभाव पडता है.

शरीर में सूजन पैदा करते हैं प्रदूषण के सूक्ष्म कण

डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण के सूक्ष्म कण जब खून में पहुंचते हैं तो वे शरीर में सूजन पैदा करते हैं. यह सूजन खून की नलियों की भीतरी परत (Endothelium) को नुकसान पहुंचाती है, जिससे धमनियों में प्लाक बनने लगता है. जैसे किसी पाइप के अंदर जंग लगने से पानी का बहाव कम हो जाता है, वैसे ही प्लाक खून के बहाव को बाधित कर देता है. धीरे-धीरे यह ब्लॉकेज बढ़ता जाता है और व्यक्ति हार्ट अटैक या स्ट्रोक की कगार पर पहुंच जाता है.

खून का बहाव रुक जाता है और हो जाता है हार्ट अटैक

प्रदूषित हवा न केवल सूजन को बढ़ाती है बल्कि खून की गाढ़ेपन को भी प्रभावित करती है. ऐसे में रक्त के प्लेटलेट्स आपस में चिपकने लगते हैं और थक्के (Clots) बनते हैं. ये थक्के अगर दिल की किसी धमनी में फंस जाएं तो खून का बहाव रुक जाता है और हार्ट अटैक हो जाता है. इसी तरह अगर यह थक्का दिमाग तक जाने वाली नसों में पहुंच जाए तो व्यक्ति को स्ट्रोक भी हो सकता है.

शरीर उसे ठीक करने के लिए बनाता है थक्का

जब दिल की किसी धमनी में जमा प्लाक फटता है तो शरीर उसे ठीक करने के लिए थक्का बनाता है. अगर खून पहले से ही प्रदूषण की वजह से गाढ़ा है तो यह थक्का बहुत बड़ा और खतरनाक हो सकता है. यह पूरी धमनी को ब्लॉक कर देता है, जिससे दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और हार्ट अटैक हो जाता है. यही स्थिति अगर दिमाग में होती है तो ब्रेन सेल्स तक ऑक्सीजन की कमी के कारण स्ट्रोक होता है. पॉल्यूशन का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. कुछ लोग इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं जैसे-जो लोग पहले से ही दिल की बीमारी है.

प्रदूषित मौसम में बरतनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी

हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज़ से पीड़ित हैं बुजुर्ग, जिनका कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम कमजोर होता है. स्मोकर्स या वे लोग जो अधिकतर समय बाहर रहते हैं. ऐसे लोगों को प्रदूषित मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. दिल को पॉल्यूशन के असर से बचाने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी कदम अपनाना बेहद जरूरी है. अपने इलाके का Air Quality Index (AQI) रोज़ाना जांचें. हवा बहुत प्रदूषित हो तो घर से बाहर निकलने से बचें. बाहर जाते समय एन-95 मास्क पहनें. घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें. अपने ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें. संतुलित आहार, व्यायाम और पर्याप्त नींद से इम्यून सिस्टम मजबूत रखें.

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