पाकिस्तान की धुनाई के बाद ब्रह्मोस की फैन बनी दुनिया, 450 मिलियन डॉलर की हो गई डील

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India BrahMos Missile : एक बार फिर भारत की रक्षा तकनीक और रणनीतिक कूटनीति ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. बता दें कि पाकिस्‍तानी आतंकियों की धज्जियां उड़ाने वाले ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का करीब 450 मिलियन डॉलर का सौदा अब लगभग अंतिम मोड़ पर पहुंच चुका है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार भारत और रूस की संयुक्त तकनीक से विकसित यह मिसाइल आज सबसे विश्वसनीय सामरिक प्रणालियों में शामिल है. काफी लंबे समय से कई देश इसे खरीदने के लिए उत्‍सुक है और अब यह सौदा भारत के रक्षा उद्योग को नए आयाम देने वाला साबित हो सकता है.

मीडिया रिपोर्ट के मुतबिक, रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्र का कहना है कि कुछ ही समय पहले संभावित खरीददार देशों ने सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस की ओर से हासिल किए गए परिणामों को बारीकी से देखा और साथ ही इसकी सटीकता से बेहद प्रभावित हुए. बता दें कि ब्रह्मोस की इसी खासियत ने इस सौदे को अंतिम चरण तक पहुंचा दिया है. इतना ही नही बल्कि उम्‍मीद जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में आधिकारिक हस्ताक्षर भी हो जाएंगे.

ब्रह्मोस की मांग बढ़ी

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्‍तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिष्ठा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पहली बार ब्रह्मोस को इस अभियान के युद्ध क्षेत्र में तैनात किया गया. ऐसे में इस मिसाइल का उपयोग करते हुए भारतीय सैन्य बलों ने तेज, सटीक और अत्यधिक असरदार हमले किए, जिसकी वजह से पूरी दुनिया के राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसकी तकनीकी क्षमता पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया.

ऑपरेशन सिंदूर भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण

बता दें कि भारत द्वारा इस हमले के बाद कई दिनों तक पाकिस्‍तानी आतंकी ठिकाने काम नहीं कर सके. जिससे यह साबित होता है कि ब्रह्मोस केवल तेज नहीं, बल्कि राजनीतिक परिणाम देने में भी किसी से कम नहीं है. इसके साथ ही दुबई एयर शो में भी ब्रह्मोस की प्रदर्शनी ने दुनिया के कई रक्षा प्रतिनिधियों को आकर्षित किया. ऐसे में इसकी ता‍कत देखने के बाद जो देश पहले जानकारी जुटा रहे थे अब वे वास्तविक खरीद की प्रक्रिया में आ चुके हैं. जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर भारत के लिए सिर्फ युद्धक सफलता नहीं बल्कि यह तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी प्रमाण बनकर उभरा.

सभी दिशाओं में बेहद सटीक प्रहार की सुविधा

जानकारी के मुताबिक, भारत अपनी सेना को भी नई क्षमता से लैस कर रहा है. बता दें कि सीमा पर तनाव बढ़ने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने नौसेना और वायुसेना के लिए ब्रह्मोस की नई खेप को मंजूरी दी. इसके साथ ही वायुसेना भी अपने Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इस मिसाइल का एकीकरण तेजी से पूरा कर रही है. ये भी बता दें कि ये सभी संयोजन भारत को हवा, समुद्र और जमीन सभी दिशाओं में बेहद सटीक प्रहार की सुविधा देता है.

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